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भिक्षुक मुक्त शहर बनाने की कवायद, भिक्षुकों को मिलेगा आश्रय, प्रशिक्षण और रोजगार

केंद्र सरकार की सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज (स्माइल) योजना के तहत अहमदाबाद को भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए मनपा, पुलिस, समाज सुरक्षा विभाग और केंद्र सरकार के बीच संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
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Ahmedabad news

बैठक के दौरान मौजूद अधिककारी गण।

Ahmedabad शहर की सड़कों, चौराहों और धार्मिक स्थलों पर भीख मांगकर जीवनयापन करने वाले लोगों को अब सिर्फ हटाया ही नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की दिशा में भी अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा), शहर पुलिस सक्रिय प्रयास करेगी। इसके कारण न सिर्फ भिक्षा से मुक्ति मिलेगी बल्कि उन्हें रोजगार तक उपलब्ध कराने में सफलता मिल सकेगी।

केंद्र सरकार की सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज (स्माइल) योजना के तहत अहमदाबाद को भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए मनपा, पुलिस, समाज सुरक्षा विभाग और केंद्र सरकार के बीच संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

इसके तहत भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों को आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाएगा।इस संबंध में शुक्रवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मोना खंधार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक की गई। बैठक में अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा) आयुक्त बंछानिधि पाणि, अहमदाबाद और गांधीनगर मनपा, समाज सुरक्षा विभाग तथा शहर व गांधीनगर जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

50 लोगों की क्षमता वाला बनेगा बेगरी होम

बैठक में भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों के सर्वांगीण पुनर्वास के लिए अस्थायी आश्रय गृह स्थापित करने की योजना पर चर्चा की गई। केंद्र सरकार की स्माइल योजना के तहत 50 व्यक्तियों की क्षमता का बेगरी होम बनाया जाएगा। इसके लिए 55 लाख रुपए की अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इन आश्रय गृहों में रहने वालों को स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

मुक्त भिक्षुकों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

मनपा के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करना ही नहीं, बल्कि बच्चों को भीख मांगने की प्रवृत्ति से बाहर निकालना, परिवार से बिछड़ चुके लोगों का पुनर्मिलन कराना, बुजुर्ग एवं असहाय लोगों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना तथा काम करने में सक्षम लोगों को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना भी है। अधिकारियों का मानना है कि बहु-विभागीय समन्वय से शहर को अधिक स्वच्छ, व्यवस्थित और सामाजिक रूप से संवेदनशील बनाने में मदद मिलेगी।