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Chathh Puja: घाट पर गूंजे छठी मईया के गीत

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Chathh Puja: घाट पर गूंजे छठी मईया के गीत

Chathh Puja: घाट पर गूंजे छठी मईया के गीत

अहमदाबाद. लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर शनिवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया गया। अहमदाबाद के हांसोल स्थित इंदिरा ब्रिज के नीचे और दशा मां मंदिर के पास साबरमती नदी के तट के साथ-साथ कडी,कलोल, मेहसाणा,वडोदरा, वासद, सूरत, राजकोट सहित अन्य स्थलों पर छठ महापर्व के तीसरे दिन शनिवार को बिहार, झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों ने डूबते हुए सूर्य को अघ्र्र्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर घाट पर व्रती महिलाएं 'केरवा जे फरेला घवद से ओ पे सुगा मडऱाय..., सुगवा केमरबौ धनुख से सुगा गिरि मुरछाय...' 'एक मुठ्ठी जिरवा बोवनी, जिरवा भइले कचनार...' और ' कांचहि बास के बहंगिया, बहंगिया लचकत जाय...' जैसे लोक गीत गाती दिखीं।
अस्ताचल सूर्य को अघ्र्य देने आईं मूल रूप से बिहार के मोतिहारी जिले की निवासी आरती प्रसाद नेे बताया कि अघ्र्य में केला, गन्ना, संतरा, अदरक, अरवी, नारियल, ठेकुआ और दीप बांस के सूप व डलिया में रखकर लाया गया। शाम छह बजते ही व्रतियों ने भगवान सूर्य को अघ्र्य देना शुरू कर दिया। इस मौके पर सुहागिन महिला व्रतियों ने विशेष रूप से नकभरुआ सिंदूर लगा रखा था।
बिहार के आरा जिले के मूल निवासी अशोक ओझा ने बताया छठ पर्व के असर पर व्रती को क्रोध करना व क्रोध दिलाना दोनों वर्जित है। वहीं किसी के बैठे हुए आसन पर बिना धोए-पोछे नहीं बैठ सकता है। मिट्टी का नया चुल्हा बना कर या नए ईंटों को जोड़कर बने चुल्हे में प्रसाद बनता है। इस विधान में कोई पुरोहित नहीं होता। ईश्वर से भक्त स्वयं अपनी याचना करता है। बांस के सूप व डलिया में प्रसाद रखकर अस्ताचल गामी सूर्य को प्रसाद चढ़ाया गया।

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