27 जून 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब बॉस के नाम से जिप फाइल भेजकर ठग रहे शातिर

-अहमदाबाद शहर साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों को किया सचेत, फोन पर बात होने के बाद ही किसी को भी भेजें पैसे, मैसेज पर नहीं करें भरोसा
2 min read
Google source verification
Cyber crime branch

अहमदाबाद शहर साइबर क्राइम ब्रांच।

Ahmedabad. साइबर ठग गिरोह की ओर से लोगों को ठगने का एक नया तरीका अपनाया जा रहा है। साइबर ठग अब नौकरपेशा और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), या फिर ऊपरी अधिकारी यानी बॉस बनकर वॉट्सएप पर मैसेज भेज रहे हैं। इसके साथ में वे एपीके फाइल की जगह जिप फाइल भेज रहे हैं। ऐसी जिप फाइल को क्लिक करके डाउनलोड करते ही संबंधित व्यक्ति का मोबाइल फोन हैक हो जाता है और उसका पूरा नियंत्रण साइबर ठग ले लेते हैं। उसके बाद उसके मोबाइल के जरिए बैंक खातों से नकदी को ट्रांसफर कर लेते हैं।

अहमदाबाद शहर साइबर क्राइम ब्रांच की उपायुक्त (डीसीपी) डॉ.लवीना सिन्हा ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि यह नए प्रकार की मोडस ऑपरेंडी है, जिसे इन दिनों साइबर ठग गिरोह की ओर से देशभर में अपनाया जा रहा है। इस प्रकार की एमओ के जरिए ठगी करने का एक मामला अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच में भी दर्ज हुआ है। टीमें उसकी जांच में जुटी हैं।डॉ. लवीना ने बताया कि इसे बॉस स्कैम या फिर सीइओ इम्पर्सनेशन फ्रॉड कहा जा रहा है। इसलिए यह नाम दिया है क्योंकि साइबर आरोपी कंपनी के सीईओ, निदेशक या उच्च अधिकारी बनकर कर्मचारी को वॉट्सएप पर मैसेज और ई-मेल भी भेजते हैं। इसके अलावा आरबीआइ का सरकारी अधिकारी बनकर भी कुछ ई-मेल और मैसेज भेजे जाने का पता चला है। इस मैसेज के साथ में वे एक जिप फाइल भी भेजते हैं।

इसमें डॉट ईएक्सई या डॉट डीएलएल फाइल होती है। मैसेज भेजकर तत्काल रिप्लाई करने को कहते हैं, जिससे कर्मचारी बिना ज्यादा सोचे फाइल को डाउनलोड कर लेता है। ऐसे में उसका मोबाइल हैक हो जाता है और शातिर आरोपी उसके मोबाइल से लिंक बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। इस प्रकार के मैसेज आते हैं कि तत्काल सुरक्षा अपडेट करना जरूरी है, थोड़े समय में जवाब देना जरूरी है, या फिर पैसों की जरूरत है, तत्काल भेजें।

सीईओ, निदेशक का असली नंबर कर देते हैं डीलिट

आरोपी मोबाइल हैक हो जाने पर सीईओ, निदेशक या बॉस का नंबर डीलिट कर देते हैं,उसकी जगह खुद का नंबर डाल देते हैं। उससे चैट करते हैं। असली नंबर डीलिट हो जाता है और बदला नंबर बंद होता है, जिससे जल्द संपर्क भी नहीं हो पाता। ऐसे में कर्मचारी बिना सोचे और बात किए पैसे ट्रांसफर कर देता है।

पहले बात करें या मुलाकात करें फिर आगे बढ़ें

डीसीपी डॉ.सिन्हा ने कहा कि इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि कर्मचारी उनके बॉस या ऊपरी अधिकारी के नाम से आए मैसेज पर पूरा भरोसा न करें। खासकर पैसों के लेनदेन में। पहले उनसे अन्य नंबर पर बात करें, वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल से यदि ना हो तो रूबरू संपर्क करें, उसके बाद ही पैसे भेजें। वॉट्सएप पर टू वे ऑथेंटिकेशन व सिक्युरिटी फीचर ऑन रखें। ईमेल, वॉट्सएप से आइ जिप में मौजूद डॉट ईएक्सई एवं डीएलएल फाइल को डाउनलोड ना करें।