Ahmedabad News सैनिकों को जल्द मिलेगी सुरक्षा की दीवार

Ahmedabad News सैनिकों को जल्द मिलेगी सुरक्षा की दीवार
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nagendra singh rathore | Updated: 21 Sep 2019, 10:19:35 PM (IST) Ahmedabad, Ahmedabad, Gujarat, India

GFSU, Ballestic test range, Army, Bulletproof jacket, helmet, vehicle, Navy, Rajasthan police, जीएफएसयू बैलेस्टिक टेस्ट रेंज चल रहा है बुलेटप्रूफ जैकेट को परखने का काम, राजस्थान पुलिस सहित छह राज्यों की पुलिस के बुलेटप्रूप जैकेट, नौसेना, वायु सेना एवं अद्र्धसैनिक बल भी यहां करवाते हैं जांच

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. देश की सीमाओं पर आतंकवादियों, घुसपैठियों से आए दिन मुकाबला करने वाले सैनिकों को जल्द ही सुरक्षा की दीवार मिलने वाली है। ऐसी दीवार जिसकी बदौलत वे चलती गोलियों के बीच भी खुद को सुरक्षित रखते हुए सीमा की रक्षा कर सकेंगे।
इससे जुड़ा कामकाज फिलहाल गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्थित गुजरात फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (जीएफएसयू) के बैलेस्टिक रिसर्च एंड टेस्टिंग रेंज में चल रहा है। जहां सेना अपने सैनिकों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने से पहले उसकी जांच-परख करवा रही है। इन दिनों यहां बुलेटप्रूफ जैकेट की गुणवत्ताओं को टेस्ट किया जा रहा है। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके परिणाम के आधार पर जल्द ही ये जैकेट सैनिकों को उपलब्ध करवाए जाएंगे।
जनवरी २०१६ में जीएफएसयू परिसर में स्थित इस बैलेस्टिक आर्मर मटीरियल्स टेस्टिंग रेंज व रिसर्च सेंटर की शुरूआत की गई। यहां सेना के अलावा नौसेना (नेवी), वायुसेना (एयरफोर्स) और अद्र्धसैनिक बलों में बीएसएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी की ओर से भी बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट खरीदने से पहले उनकी जांच करवाई जाती है।
गुजरात, राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर, गोवा, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश की की पुलिस भी अपने जवानों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने से पहले उसकी जांच इस रेंज में करवाते हैं।
इसके अलावा बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने वाली एवं आर्मर वाहन बनाने वाली निजी कंपनियां भी यहां जांच करवा रही हैं। इस रेंज में न सिर्फ बुलेटप्रूफ जैकेट, बल्कि हेलमेट, पटका, स्टील, ग्लास (कांच) के भी बुलेटप्रूफ होने से जुड़ी जांच की जाती है।
इसके अलावा हल्के से भारी भरकम छह टन वजन तक की बुलेटप्रूफ गाडिय़ों की भी बुलेटप्रूफ होने से जुड़ी जांच की जाती है। हर साल 13 सौ से लेकर औसतन पंद्रह सौ जैकेट, हेलमेट, पटका, स्टील, ग्लास और आम्र्ड वाहनों की जांच होती है।

१५० फुट लंबी, साउंड प्रूफ है रेंज
ये बैलेस्टिक आर्मर मटीरियल्स टेस्टिंग रेंज व रिसर्च सेंटर १५० फुट लंबा, ५० फुट चौड़ा और ३० से ३५ फुट ऊंचा व साउंड प्रूफ है। विश्वभर के नाटो, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस एंड एडवांस बेलेस्टिक्स टेक्नोलॉजी सेंटर्स में अपनाए जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप यहां जांच की सुविधा सुनिश्चित की गई है।
-डॉ.जे.एम.व्यास, महानिदेशक, जीएफएसयू

टेस्ट प्रक्रिया देखने, सैंपल वापस ले जाने की भी है सुविधा
यहां बैलेस्टिक जांच किस प्रकार से की जा जाती है,उसे जांच कराने वाली एजेंसी, कंपनी के व्यक्ति यदि देखना चाहते हैं तो जांच के दौरान बैठकर वे उसे देख सकते हैं। सैंपल भी चाहें तो वापस ले जा सकते हैं।
-एस.जी.खंडेलवाल, प्रमुख, बैलेस्टिक टेस्टिंग रेंज, जीएफएसयू

जैकेट की जांच अधिक
रेंज में यूं तो जैकेट, हेलमेट, स्टील, ग्लास, पटका और आर्मर वाहन व टायर की बुलेटप्रूफ होने से जुड़ी जांच और उसका सर्टिफिकेशन किया जाता है। लेकिन जांच के लिए आने वाले सैंपलों में करीब ६५ से ७० फीसदी तक जैकेट ही होते हैं। फिर स्टील और फिर ग्लास व हेलमेट।
-सौरभ कुमार, साइंटिफिक ऑफिसर, बैलेस्टिक टेस्टिंग रेंज

सेना और अद्र्धसैनिकों में ये कराते हैं जांच

सेना, नौसेना, वायुसेना, सीआरपीएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ।

इन वस्तुओं की होती है बैलेस्टिक जांच

बुलेटप्रूफ जैकेट, स्टील, ग्लास, पटका, हेलमेट, आर्मर वाहन, टायर।

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