17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वंजारा-अमीन की याचिका पर सीबीआई ने जवाब के लिए समय मांगा

इशरत जहां मुठभेड़ प्रकरण

2 min read
Google source verification
Ishrat encounter case: CBI saught time for reply

अहमदाबाद. इशरत जहां मुठभेड़ प्रकरण में सीबीआई ने गुजरात पुलिस के पूर्व अधिकारियों-डी. जी. वंजारा और नरेन्द्र के. अमीन की ओर से दायर आरोप मुक्ति (डिस्चार्ज) की याचिका पर जवाब पेश करने के लिए समय मांगा।
सीबीआई की गुहार पर विशेष सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रेल को होगी। वंजारा व अमीन ने गत महीने विशेष अदालत के समक्ष आरोप मुक्ति की गुहार लगाई है। इस प्रकरण में विशेष अदालत राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आरोप मुक्त कर चुकी है।
अमीन उन सात पुलिस अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें सीबीआई ने अपने पहले आरोपपत्र में आरोपी बनाया था। अमीन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सीबीआई ने कुछ आरोपियों को गवाह बनाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। याचिका में आरोपपत्र को मनगढ़ंत बताते हुए यह कहा गया कि अधिकांश तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
अमीन की याचिका में कहा गया कि आरोपपत्र की वैधता पर उसी अदालत को फैसला सुनाना चाहिए जिस अदालत ने पांडे की आरोपमुक्ति की याचिका सुनी है।
अगस्त 2015 में गुजरात पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले अमीन को राज्य सरकार ने एक वर्ष के सेवाकाल का विस्तार दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अमीन के साथ-साथ इस मामले में एक अन्य आरोपी तरुण बारोट को सेवानिवृत्त के बाद फिर से नियुक्त करने के खिलाफ दायर याचिका के बाद अमीन को त्यागपत्र देना पड़ा।
उधर वंजारा ने अपनी आरोप मुक्ति की याचिका में यह दावा किया है कि इस मामले में रिकॉर्ड पर सभी सामग्री एक झूठी कहानी है। सीबीआई की ओर से गवाहों के दर्ज किए बयान काफी शंकास्पद हैं तथा षडयंत्र को सिद्ध करने के लिए प्रथम दृष्टया कोई भी अभियोज्य सबूत नहीं हैं। इस मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं ने पांडे की तरह साम्यता बताते हुए आरोप मुक्ति की मांग लगाई है।
सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2013 में पांडे, वंजारा सहित सहित गुजरात पुलिस के सात आरोपी अधिकारियों के खिलाफ पहला आरोपपत्र पेश किया था। इन सभी पर हत्या, अपहरण व षडयंत्र का आरोप लगाया गया। इसके बाद सीबीआई ने आईबी के चार अधिकारियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र पेश किया था।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद के बाहरी इलाके में 15 जून 2004 को मुंबई के पास मुंब्रा की 19 वर्षीया युवती इशरत जहां, प्रणेश पिल्लई उर्फ जावेद पिल्लई तथा दो पाकिस्तानी आतंकियों-जीशान जौहर व अमजद अली राणा को मुठभेड़ में मार गिराया था। क्राइम ब्रांच का दावा था कि ये सभी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरन्द्र मोदी की हत्या के मिशन पर आए थे।