
अहमदाबाद. अहमदाबाद महानगरपालिका (एएमसी) के अहमदाबाद का नाम ‘अमदावाद’ के रूप में उपयोग करने के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से शहर का नाम बदलने के लिए प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई जून महीने में रखी गई है।
सुन्नी आवामी फोरम की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मनपा अपने आधिकारिक दस्तावेजों, लेटरहैड, विज्ञापनों सहित अन्य में अहमदाबाद का नाम ‘अमदावाद’ के रूप में करती है। भारतीय जनगणना कार्यालय के मुताबिक शहर का आधिकारिक रूप से पंजीकृत नाम अहमदाबाद है। वर्ष 2017 में यूनेस्को ने भी अहमदाबाद को भारत के पहले शहर के रूप में विश्व विरासत शहर की सूची में शामिल किया है। अहमदाबाद शहर की स्थापना वर्ष 1411 में की गई। तत्कालीन शासक अहमद शाह के नाम पर अहमदाबाद शहर का नाम रखा गया।
याचिका के अनुसार अहमदाबाद में 15वीं व 16वीं शताब्दी के स्थापत्य हैं। यह स्थापत्य शहर के मुस्लिम शासकों की ओर से निर्मित करवाए गए हैं। यूनेस्को में अहमदाबाद के नामांकन का 20 शहरों ने समर्थन किया था। भारत की ओर से कहा गया था कि अहमदाबाद 600 वर्षों से ज्यादा समय से शांति व एकता के लिए जाना जाता है। साथ ही यह शहर भारतीय-इस्लामिक स्थापत्य व हिन्दू मुस्लिम कला का बेजोड़ नमूना है। अहमदाबाद को विश्व विरासत सूची के रूप में शामिल किए जाने में इस्लामिक, ईसाई व पारसी विरासत व स्थापत्य की अहम भूमिका है। इसके अलावा एएमसी अपने विज्ञापनों में चबूतरा के चिह्न का उपयोग करती है जो 19वीं सदी को इंगित करता है। सिर्फ चबूतरा का चिह्न शहर के भारतीय-इस्लामिक वास्तु के महत्व का अपमान है।
याचिका के मुताबिक अमदावाद और चबूतरे का उपयोग भ्रामक है। वह भी तब जब दुनिया भर से पर्यटक अहमदाबाद घूमने आते हैं। अहमदाबाद का अमदावाद के रूप में उपयोग देसी रूपांतरण है।
याचिका में यह बताया गया कि इस संबंध में आरटीआई से यह पता चला कि अमदावाद नाम के उपयोग को लेकर किसी तरह का आधिकारिक अधिसूचना या सरकारी प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है। इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से एएमसी के समक्ष गुहार लगाई गई, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी।
Published on:
11 Apr 2018 11:49 pm
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