राजस्थान के डूंगरपुर जिले की एक महिला ने अपने ब्रेनडेड पति के चार अंगों का दान देकर चार जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी देने का काम किया है। इस महिला ने यह महादान विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या पर किया। इसके साथ ही अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में अब तक 180 ब्रेन डेड मरीजों के अंगों से 569 लोगों को बचा लिया गया।डूंगरपुर जिले के निवासी मोहनलाल यादव (51) गत 26 फरवरी को अहमदाबाद के निकोल में मार्बल की फैक्ट्री में काम करते समय गिर गए थे। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गहरी चोट लगने के कारण पहले उन्हें निकोल स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया। उसके बाद उन्हें गुजरात कैंसर सोसाइटी संचालित जीसीएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। गहन उपचार के लिए उन्हें गत 4 मार्च को असारवा स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उचित उपचार के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विशेष जांच के बाद चिकित्सकों ने शुक्रवार को मोहनलाल को ब्रेनडेड घोषित कर दिया।
मोहनलाल की इस स्थिति के बारे में अस्पताल के चिकित्सकों ने परिजनों को समझाया। साथ ही अंगदान के लिए परामर्श भी दिया। उस दौरान मोहनलाल की पत्नी बबलीदेवी, पुत्र निलेश, जयेश तथा पुत्री भारती ने जरूरतमंदों के हित में परोपकार की भावना से अंगदान की स्वीकृति दी। इसके बाद उनकी दो किडनी, लिवर और हृदय को दान के रूप में स्वीकार किया गया।
हृदय को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पहुंचाया
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि जिन चार अंगों का दान किया गया है उनमें से हृदय को ग्रीन कॉरिडोर से शहर के मरैंगो सिम्स हॉस्पिटल पहुंचाया गया। जहां जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। इसके अलावा दोनों किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण सिविल अस्पताल कैंपस के ही इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में किया गया। उन्होंने बताया कि अब तक 180 ब्रेनडेड मरीजों के 587 अंग दान में मिले हैं, इनसे 569 लोगों को जीवन मिला है।