
राम, सीता और लक्ष्मण हमारे संविधान का हिस्सा: उप राष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जो हमें संविधान दिया उस संविधान में 22 चित्र हैं। 5000 साल की हमारी सांस्कृतिक विरासत की झलक है। सारनाथ का अशोक चिन्ह है। उसमें गुरुकुल की परिपाटी शामिल है। उसका जो सबसे महत्वपूर्ण भाग है, जिसको हम मौलिक अधिकार कहते हैं। मौलिक अधिकार, लोकतंत्र का अमृत, लोकतांत्रिक मूल्यों का सार, उसके बिना लोकतंत्र अधूरा है।उस मौलिक अधिकार का जो पाठ है, उसके ऊपर जो चित्र है, वह राम, सीता और लक्ष्मण का है। राम, सीता और लक्ष्मण हमारे संविधान का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो पुस्तकें प्रसारित हैं, उनमें वह चित्र क्यों नहीं है?
वे शुक्रवार को गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) के 72वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि पद से संबोधित कर रहे थे। समारोह में 51622 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। 279 पदक और 66 पुरस्कार प्रदान किए गए।
उपराष्ट्रपति ने अटल कलाम एक्सटेंशन रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, शिक्षामंत्री ऋषिकेश पटेल, कुलपति प्रो.नीरजा गुप्ता, कुलसचिव डॉ.पी.एम.पटेल, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
...तो नहीं होती कश्मीर की समस्या
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू और कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका रही। यदि सरदार पटेल जम्मू और कश्मीर के एकीकरण में शामिल होते तो विश्वास कीजिए कोई समस्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि डॉ.बाबा साहब अंबेडकर को भी इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने आर्टिकल 370 को छोड़कर देश के पूरे संविधान को तैयार किया। तत्कालीन नेतृत्व ने इन दोनों को इसमें शामिल नहीं किया, नतीजा यह रहा कि मुद्दे पैदा हुए, उनका हल इस कालखंड में निकला। संविधान में आर्टिकल 370 और 35 ए अस्थायी था, लेकिन वह स्थायी बन गया था, लेकिन अब वह नहीं है।
गुजरात की मिट्टी में कुछ खास है
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात की मिट्टी में कुछ खास है, क्योंकि हर काल खंड में यहां के महापुरुषों ने हमें रास्ता दिखाया है, देश का निर्माण किया है। पहले महात्मा गांधी और सरदार पटेल और आज के समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह।
शोध के लिए शिक्षा संस्थानों को संभाले कॉरपोरेट्स
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे कॉरपोरेट्स, उद्योग, व्यवसाय और व्यापार के लोगों को अनुसंधान और विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों को संभालने का समय आ गया है। यह साझेदारी युवक और युवतियों को विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के सकारात्मक पहलुओं का पूरी तरह से फायदा उठाने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने युवाओं को नवाचार में संलग्न होने और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने में ‘सबसे आगे’ रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
विघटन को हथियार बनाने वालों को जवाबदेह बनाएं युवा
उपराष्ट्रपति ने युवा नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक तंत्र में अशांति और विघटन को हथियार बनाने वालों को जवाबदेह बनाएं। उन्होंने कहा कि समझदार छात्र, लोकतांत्रिक शासन को बहुत प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में कभी कोई व्यवधान नहीं हुआ, अशांति नहीं हुई। जब सदन में विघ्न और उपद्रव होता है, तो मेरे मन में बड़ी पीड़ा होती है। ये रुकना चाहिए। हमारे प्रतिनिधियों को संविधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्धारित मूल्यों के प्रति बेहद सक्रिय रहना होगा।
Published on:
19 Jan 2024 10:49 pm

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