
आर्य समाज का लक्ष्य देश का विकास ही रहा: राज्यपाल
राजकोट. राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि आर्य समाज एक राष्ट्रवादी संस्था है और प्रारंभ से ही उसका लक्ष्य देश का विकास ही रहा है। आर्य समाज के नियमों में संस्कारों का सिंचन, शारीरिक और सामाजिक विकास तथा देश की उन्नति का उल्लेख है। संसार का उत्थान करना ही आर्य समाज का मुख्य लक्ष्य है।
मोरबी जिले के टंकारा में सोमवार को महर्षि दयानंद सरस्वती के 200 वें जन्मोत्सव -ज्ञान ज्योति पर्व- स्मरणोत्सव समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने एक मुश्किल समय में देश में महिला शिक्षा, दलित और आदिवासी उत्कर्ष की हिमायत कर पूरी मानव जाति को समरसता का पाठ सिखाया था। महर्षि दयानंद सरस्वती ने स्वदेशी के नारे के साथ आजादी का बिगुल फूंककर देश में क्रांतिकारी सेना का निर्माण किया था। भारत की आध्यात्मिक चेतना को जगाकर अज्ञान-पाखंड को दूर करने का कार्य किया।
टंकारा में ओवरब्रिज का नाम महर्षि दयानंद के नाम पर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राज्य सरकार ने इस अवसर पर टंकारा में निर्मित एक ओवरब्रिज का नाम ‘महर्षि दयानंद ओवरब्रिज’ रखने का निर्णय किया है। उन्होंने टंकारा आने वाले दर्शनार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महर्षि दयानंद ट्रस्ट को राजकोट-मोरबी राजमार्ग पर ज्ञान ज्योति तीर्थ के लिए भूमि भी आवंटित की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म परिषद् में जाने से पहले गुजरात की इस पावन भूमि पर विचरण किया था। पटेल ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ मंत्र का अनुकरण करते हुए जरूरतमंद लोगों तक आवास, स्वास्थ्य, आहार आदि सुविधाएं पहुंची हैं तथा विकास के अमृतकाल का उदय हुआ है।
राष्ट्रपति को प्रदर्शनी खंड के बारे में बताया
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मोरबी जिले के टंकारा में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन दर्शन को उजागर करने वाले प्रदर्शनी खंड की जानकारी दी। टंकारा में 15 एकड़ भूमि पर 200 करोड़ रुपए के खर्च से ज्योति तीर्थ का निर्माण होगा। राज्यपाल ने इस तीर्थ में निर्मित होने वाले शोध केन्द्र, स्कूल, पुस्तकालय, रमणीय परिसर आदि की विस्तृत जानकारी दी।
इस प्रदर्शनी खंड में राष्ट्रनिर्माण के लिए महर्षि दयानन्द सरस्वती के किए गए प्रवास को नक्शे के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। उनके जीवन प्रसंगों को चित्रों में प्रदर्शित किया गया है। उनके साथ जुड़े ऐतिहासिक स्मृति स्थलों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई है। महिला शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के विचारों के साथ ही वेदों में विद्यमान विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए विचार भी इस प्रदर्शनी खंड में प्रस्तुत किए गए हैं। इस अवसर पर आर्य समाज के सुरेशचंद्र आर्य, पद्मश्री पूनम सूरी, विनय आर्य, सुरेन्द्र कुमार आर्य, अजय सहगल, प्रकाश आर्य सहित कई अग्रणी, आर्य समाज संस्थान के ट्रस्टीगण, स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति का स्वागत किया।
राज्यपाल की सराहना
राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में अमूल्य मार्गदर्शन करते रहे हैं। सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मानवता के भविष्य और स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। स्वच्छ जल और अच्छी मिट्टी के बिना शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता। प्राकृतिक कृषि को अपनाना जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज संस्था से जुड़े लगभग 10,000 केंद्र आज मानवता के विकास और कल्याण के लिए कार्यरत हैं। 200वें जन्मोत्सव के आयोजन के लिए उन्होंने दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा, श्री महर्षि दयानंद सरस्वती स्मारक ट्रस्ट टंकारा तथा समस्त आर्य संगठनों की सराहना की।
Published on:
12 Feb 2024 10:23 pm

बड़ी खबरें
View Allअहमदाबाद
गुजरात
ट्रेंडिंग
