
ahmedabad
आणंद।जिले के खंभात में विलुप्त प्रजाति के तीस गिद्ध देखे गए हैं। इसे लेकर पक्षी विशेषज्ञों में खुशी का माहौल है। राज्यभर में धीग-धीरे गिद्ध विलुप्त होते जा रहे हैं और इसे लेकर पक्षी विशेषज्ञ खासे चिंतित हैं। एसे में खंभात में एक साथ गिद्धों को देखकर पक्षी विशेषज्ञ भी खुश हैं। कुछ समय पूर्व पक्षियों की गणना के समय इस क्षेत्र में गिद्धों की संख्या 15 थी। अब तीस गिद्धों के देखे जाने पर पक्षी विशेषज्ञ इनकी दिन चर्या का अध्ययन कर रहे हैं। शहर सहित जिलेभर में पहले काफी संख्या में गिद्ध देखने को मिलते थे लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या में कमी होने लगी। इस दौरान एक अध्ययन में यह जानकारी मिली की पशुओं को दी जाने वाली डायक्लोफेन नाम दवा से इनकी मौत हो जाती थी।
इन मृत पशुओं के मांस खाने से गिद्धों की मौत हो जाती थी। जानकारी सामने आने पर राज्य सरकार ने पशुओं को दी जाने वाली दर्द निवारक दवा डायक्लोफेस पर प्रतिप्रंध लगा दिया। इससे धीरे-धीरे गिद्धों की संख्या में वृद्धि होने लगी। इस संबंध में खंभात रेंज के वन अधिकारी वी.ए.झाला ने कहा कि खंभात क्षेत्र के नगरा, नेजा जीणज व इसके आसपास के क्षेत्रों खंभात, तारापुर रोड पर ताड़ के ऊंचे-ऊंचे पेड़ हैं। गिद्ध आमतौर पर ऊंची जगहों पर ही अपना घोसला बनाते हैं। इसके लिए वे इसे काफी सुरक्षित मानते हैं।
इन जगहों पर उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल रहा है, इस लिए इनकी संख्या में भी कुछ वृद्धि देखने को मिल रही है। पक्षी विशेषज्ञों का कहना हैै कि गिद्ध वर्ष में एक बार अंडा देते हैं। ऐसे में इनके अंडों को कोई नुकसान होता है तो फिर एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ता है। इनके अंडों को खाने सेे टी.बी. की बीमारी ठीक होती है, इसलिए इसकी मांग भी ज्यादा है।
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