
सेठुलाल यादव फाइल फोटो
अजमेर(Ajmer News). पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली एकबारगी फिर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में पिछले आठ साल से फरार चल रहे सिपाही सेठुराम को विभाग ने न केवल अभी तक सेवा में बनाए रखा, बल्कि साल 2021-22 की स्क्रीनिंग पद्धति से हुई पदोन्नति में उसे हैड कांस्टेबल भी बना दिया। लेकिन पुलिस अपने ही सिपाही को अदालती वारंट तक तामील नहीं करा सकी है। इस मामले ने पुलिस बेड़े में लचर प्रशासनिक कामकाज और सिस्टम की गंभीर खामियों को चौड़े ला दिया है।
जिला पुलिस की एमओबी शाखा में तैनात गेगल थाना क्षेत्र के गगवाना निवासी सिपाही सेठुराम पर 2017-18 से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप हैं। उसने ग्रामीणों, परिचितों और पुलिसकर्मियों तक को निवेश में बड़ा मुनाफा व ब्याज का झांसा देकर करोड़ों रुपये जुटाए थे। जब लोगों को निवेश के नाम पर खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ तो गेगल थाने में सेठुराम यादव के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। जिसके बाद सेठुराम फरार हो गया। हालांकि परिजन व पुलिस की नजर में वह 8 साल बाद भी ‘लापता’ है, लेकिन पुलिस के रिकॉर्ड में वह धोखाधड़ी का आरोपी व 8 साल से फरार है।
चौंकाने वाली बात यह कि सेठुराम व उसकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद संबंधित गेगल थाना पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। पत्नी का वारंट भी तामील नहीं करवाया जा सका है।
मामले का गंभीर पहलू यह कि पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद फरवरी 2026 में साल 2021-22 की विभागीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया में फरार सिपाही सेठुराम को हैड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन दे दिया गया।विभाग ने उसे पदोन्नत करने के साथ ही प्रशिक्षण सूची में भी शामिल कर लिया। हालांकि सेठुराम प्रशिक्षण से गैरहाजिर ही रहा।
मौजूदा मामला पुलिस विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली, रिकॉर्ड प्रबंधन व जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों की भूमिका, लापरवाही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सिपाही सेठुराम यादव की फरारी और पदोन्नति की जानकारी नहीं है। प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले को दिखवाते हुए एकार्रवाई की जाएगी।
हर्षवर्धन अग्रवाला, एसपी अजमेर
Updated on:
31 Mar 2026 02:22 am
Published on:
31 Mar 2026 02:15 am
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