
famous pushkar rose in garib nawaz dargah
दुनिया को सूफियत का संदेश देने वाली ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अकीदतमंद से आबाद है। यूं तो दरगाह में साल भर गुलाब का फूल चढ़ता है, पर सालाना उर्स में यह नजारा कुछ अलग ही नजर आता है।
सहस्रों बरसों पुराने तीर्थराज पुष्कर में पनपे गुलाब हजारों साल से ख्वाजा साहब की मजार शरीफ पर चढ़ रहा है। पुष्कर के गुलाब की अद्भुत महक भारत एवं दुनिया के किसी मुल्क में नहीं मिलती। गुलाब के फूल और इनकी सुगंध आशिकाने ख्वाजा और लोगों को रूहानी सुकून पहुंचाते हैं।
दरगाह में ख्वाजा साहब की मजार शरीफ पर बीते 800 सालों से गुलाब चढ़ाया जा रहा है। मजार शरीफ पर गैंदा, गैंदी, मोगरा भी चढ़ते हैं, लेकिन इनमें गुलाब की बात ही निराली है। यहां चढऩे वाला गुलाब मुख्यत: पुष्कर में पनपता है।
पुष्कर, गनाहेड़ा, बांसेली, होकरा, बैजनाथ धाम रोड और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर गुलाब की खेती होती है। गरीब नवाज के सालाना उर्स में गुलाब की खपत यकायक बढ़ जाती है।
805 वें उर्स में मुख्य रूप से लाल गुलाब की मांग जबरदस्त बढ़ी हुई है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और अन्य प्रांतों के अलावा पाकिस्तान के जायरीन भी पुष्कर के गुलाब के मुरीद हैं।
चढ़ रहा 4 हजार किलो गुलाब
पुष्प व्यवसायी जीतमल मारोठिया ने बताया कि ख्वाजा साहब की दरगाह में आम दिनों में 1100 से 1500 किलो गुलाब चढ़ता है। सालाना उर्स में इसकी खपत जबरदस्त बढ़ गई है। 805 वें उर्स में रोजाना 4 हजार किलो लाल गुलाब चढ़ रहा है। जायरीन की बढ़ती आवक के अनुसार गुलाब के फूल पुष्कर और आसपास के क्षेत्रों से सुबह से शाम तक अजमेर पहुंचाए जा रहे हैं।
लाल गुलाब की मांग ज्यादा
उर्स में लाल गुलाब की मांग ज्यादा है। अव्वल तो यह 30 से 50 रुपए किलो में आसानी से उपलब्ध है। तिस पर गुलाबी गुलाब की खपत मुख्यत: गुलकंद बनाने में होती है। इसकी कीमत भी 70 से 90 रुपए किलो के बीच है।
लाल और गुलाबी गुलाब की महक पूरे देश-दुनिया में मशहूर है। मालूम हो कि मुगल बादशाह जहांगीर की पत्नी नूरजहां ने पुष्कर के गुलाब से ही गुलाब का इत्र बनवाया था। इसके बाद ही दुनिया गुलाब के इत्र से रूबरू हुई।
साथ ले जाते हैं गुलाब, केवड़ा और इत्र
पुष्कर के गुलाब को लोग बेहद पसंद करते हैं। दरगाह आने वाले जायरीन और अन्य लोग उर्स एवं अन्य मौकों पर यहां से गुलाब के फूल, केवड़ा और इत्र साथ लेकर जाते हैं। यह गंगा-जमनी तहजीब का नायाब उदाहरण भी है।
पुष्कर की माटी में पनपने वाले लाल और गुलाबी गुलाब की महक लोगों को बहुत पसंद आती है। कई जायरीन और लोग पुष्कर से गुलाब के पौधे भी खरीदते हैं।
अजमेर में गुलाब के फूलों की दुकानें
ख्वाजा साहब की दरगाह में -30 से 40 दुकानदरगाह बाजार और अन्य क्षेत्र में-20 से 30 दुकानअजमेर में मदार गेट और अन्य इलाकों में-250 से 300 दुकान
Published on:
03 Apr 2017 05:52 am

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