
एक खेत में कृषि की उन्नत तकनीक की जानकारी देते कृषि उद्यान विभाग के अधिकारी।
अजमेर (Ajmer news). किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने और उसकी आमदनी बढ़ाने के प्रयासों के तहत राज्य सरकार ने बजट में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसमें चयनित जिलों के 2,000 किसानों, कृषि-प्रोसेसर्स, व्यापारियों और निर्यातकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कृषि प्रसंस्करण और कृषि-व्यवसाय को बढ़ावा देना है, ताकि किसान केवल कच्चा माल बेचने की बजाय मूल्य संवर्धन कर बेहतर लाभ प्राप्त कर सकें। प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक, फसल प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन के गुर सिखाए जाएंगे।
इसमें विशेष रूप से उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां विशिष्ट फसलों का उत्पादन अधिक होता है। अजमेर जिले में इस वर्ष रबी सीजन में 3 लाख 24 हजार 901 हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जिसमें 1 लाख 61 हजार 997 हेक्टेयर में चने की फसल बोई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसंस्करण व बाजार से सीधा जुड़ाव किसानों की आय बढ़ाने में अहम साबित होगा।
राजस्थान पत्रिका ने किसानों की परेशानी को उजागर करते हुए अभियान चलाया था। इसके तहत 12 जनवरी को ‘चना उत्पादन में बढ़ी अजमेर की चमक, बुवाई में आधी भागीदारी’, 13 जनवरी को ‘किसानों को नहीं मिलता पूरा समर्थन, खुले बाजार में बेचना पड़ता है चना’, 15 को ‘छोटे किसानों को मिले बड़ी राहत, एमएसपी पर बिके पूरी उपज’, 16 काे ‘बुवाई-उत्पादन ही नहीं, चने की खपत में भी जिला मजबूत’, 17 को ‘खेत से बाजार तक की दूरी, नुकसान उठा रहे हैं जिले के किसान’ शीर्षक से शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए।
ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, प्रिसीजन फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, हाईब्रिड व उन्नत बीज, पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस खेती, मशीनीकरण, आईओटी आधारित खेती, जैविक व प्राकृतिक खेती, फसल बीमा व डिजिटल मंडी, संरक्षित भंडारण तकनीक आदि।
यह कटी फसल साफ करने, सुखाने, छांटने, पीसने और पैक करने की प्रक्रिया है। यह उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाकर बाजार योग्य बनाती है। इसमें डिब्बाबंदी, फ्रोजन फूड, अनाज की मिलिंग जैसी तकनीक शामिल हैं। इससे अखाद्य फसलें खाने योग्य उत्पादों में बदल जाती हैं। यह कृषि को उद्योग से जोड़ता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
यह कृषि उत्पादों को खेत से उपभोक्ता तक पहुंचाने की प्रक्रिया है। इसमें फसल की कटाई, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, ग्रेडिंग और बिक्री शामिल है। इसका उद्देश्य किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना है। इसमें फसल का संग्रहण एवं भंडारण, परिवहन, गुणवत्ता के आधार पर उत्पादों की ग्रेडिंग, बाजार की कीमतों की जानकारी व बैंकिंग सहायता आदि शामिल है।
Updated on:
14 Feb 2026 02:56 pm
Published on:
14 Feb 2026 02:48 pm
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