
ब्रिटिशकाल में होता था परकोटे का रिकार्ड, अब नहीं सरोकार
अजमेर. अजमेर शहर के चारों ओर बना परकोटा अतिक्रमण की जद में आते रहने का कारण उसका वास्तविक रिकार्ड संधारण नहीं होना भी है। जिसका फायदा अतिक्रमी व लीजधारी उठा रहे हैं।
जानकारों के अनुसार ब्रिटिश राज में हवाई सर्वे के जरिए संपूर्ण किले की लंबाई,चौड़ाई ऊंचाई सहित संपूर्ण रिकॉर्ड का संधारण किया गया था। लेकिन आज उसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। नगर निगम में मौजूद जी. टी. शीट रिकार्ड है जिसमें सिटी वॉल एवं पुरातत्व से संबंधित जानकारी उपलब्ध बताई गई है।
किराएदारों ने किया सबलेट
नगर निगम ने जिन मूल किरायेदारों को पूर्व में परकोटे का हिस्सा किराए पर दिया उन्होंने उसे सबलेट करने के साथ ही बेचान तक कर दिया। परकोटा क्षतिग्रस्त करने पर एफआईआर दर्ज कराने के अनुशंसा के बावजूद कुछ नहीं किया गया।
नगर निगम आयुक्त हैं संपदा अधिकारी
नियमानुसार नगर निगम या राज्य सरकार की किसी भी संपदा का मालिक उसके कार्यालय प्रमुख होते हैं जिन्हें संपदा अधिकारी की शक्ति प्रदान की गई है। जिसके तहत वह किसी भी समय किसी भी संपदा पर हो रहे अतिक्रमण को हटाकर अपने कब्जे में ले सकते हैं। जो एक न्यायिक प्रक्रिया होती है ।
इनका कहना है
अभी शहर के जीर्ण-शीर्ण भवनों का सर्वे करेंगे। मानसून पहले भवन मालिकों को नोटिस व अन्य कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद परकोटे की पत्रावली को देख कर तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगवाएंगे। उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे।
सुशील कुमार, आयुक्त नगर निगम अजमेर।एक्सपर्ट व्यू
इसकी मूल पत्रावली का अध्ययन कर वास्तविक स्थिति जाननी चाहिए। लीज धारकों की सूची सार्वजनिक हो। किसी ने उपकिराएदारी या दूसरे को कब्जा दिया तो उसकी जांच होनी चाहिए। भौतिक सर्वे, अतिक्रमण है या नहीं इसकी रिपोर्ट भी आनी चाहिए। इसके लिए पुरातत्व विभाग व नगर निगम को संयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए। जिससे ऐतिहासिक परकोटे की सुंदरता व अस्तित्व बना रहे।
सुरेश सिंधी, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, अजमेर।
Published on:
28 May 2023 11:26 pm
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
