
rifle and pistol shooting
अजमेर।
जिस देश में क्रिकेट एक जुनून का रूप ले चुका है वहां पर निशानेबाजी जैसा लो-प्रोफाइल और महंगा खेल भी अब युवाओं ही नहीं बल्कि बच्चों में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स सहित विश्व निशानेबाजी प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाजों द्वारा पदक जीतने की बदौलत अब भारत में भी इस खेल के प्रति दीवानगी बढ़ती जा रही है।
ढाई लाख रुपए की राइफल और डेढ लाख रुपए की पिस्टल इसके अलावा निशानेबाजी के लिए शूटिंग रेंज और गोलियों पर होने वाला खर्च। यह कोई आसान खेल तो नहीं है लेकिन कभी रईसों और खास लोगों के इस महंगे शौक को नई पीढ़ी के साधारण परिवार के बच्चों ने अब खेल के रूप में ही परिवर्तित कर दिखाया है।
खुल रही शूटिंग अकादमियां
निशानेबाजी हमारे देश में कितनी लोकप्रिय हो चुकी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महानगरों के अलावा कमोबेश छोटे शहरों में भी लगातार शूटिंग अकादमियां खुलती जा रही है। स्कूलों में पढऩे वाले छात्र-छात्राएं हो या फिर नौकरी और व्यवसाय में व्यस्त युवा वर्ग भी इस खेल में महारत हासिल करने के लिए अभ्यास पर काफी समय दे रहे हैं।
खेल में तब्दील हुआ शौक
लोहागल रोड स्थित करणी शूटिंग रेेंज के डायरेक्टर हिम्मतसिंह का मानना है कि अमूमन एक निशानेबाज को तैयार करने में लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं। महंगी राइफल और पिस्टल के अलावा प्रेक्टिस पर ही प्रति माह पांच से दस हजार रुपए की जरूरत होती है। शूटिंग अकादमियों की ओर से निशानेबाजों को महंगी राइफल और पिस्टल मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। अत्याधुनिक शूटिंग रेज और बेहतरीन कोच की उपलब्धता की बदौलत अब साधारण परिवार के बच्चे भी कम खर्च में इस खेल को अपना सकते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ बरसों से देश में अनेक नामी निशानेबाज उभर चुके हैं।
नेशनल तक पहुंचना आसान
अमूमन अधिकांश खेलों में आगे बढऩे के लिए टीम में चयन होना जरूरी होता है। एक टीम में अधिकतम 10-11 खिलाडिय़ों की सीमा तय होने की वजह से अनेक प्रतिभावान खिलाडिय़ों को उनकी मंजिल नहीं मिल पाती। लेकिन निशानेबाजी की खासियत यह है कि इसमें टीम चयन की बाध्यता नहीं है। व्यक्तिगत स्पर्धा होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए क्वालीफाइंग स्कोर करना होता है। एक-दो वर्ष की मेहनत के बूते कोई भी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहुंचकर अपना नाम रोशन कर सकता है। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए राह काफी आसान हो जाती है।
350 निशानेबाज आजमा रहे भाग्य
करणी शूटिंग रेंज में सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती निशानेबाजी प्रतियोगिता प्रारंभ हुई। इसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के पुरुष एवं महिला वर्ग के लगभग 350-400 निशानेबाज भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता तीन दिन तक चलेगी। इसमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक विजेता उदयपुर की निशानेबाज मूमल कंवर, रुद्रप्रतापसिंह, जयपुर के देवेन्द्रसिंह भी विभिन्न आयु वर्ग में हाथ आजमा रहे हैं। यही नहीं, अजमेर मयूर स्कूल की 10 वर्षीय नन्ही छात्रा गार्गी भी भारी-भरकम राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में निशाना लगाने को तत्पर है।
Published on:
09 May 2018 10:01 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
