हाई कोर्ट ने फैसले में जांच के तरीके पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सबूत जुटाने के बुनियादी मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की खास सिफारिश के बावजूद अंग व्यापार के एंगल की जांच नहीं की गई। जांच एजेंसियों की यह विफलता जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुख्यात निठारी हत्याकांड मामले में सुरिंदर कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को सबूतों के अभाव में हत्या और बलात्कार के आरोपों से सोमवार को बरी कर दिया। निचली अदालत ने दोनों को 2009 में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। कोली को 12, जबकि पंढेर को दो मामलों में दोषी पाया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 28 जनवरी, 2015 को कोली की दया याचिका पर फैसला करने में अत्यधिक देरी के कारण मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। हाई कोर्ट ने फैसले में जांच के तरीके पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सबूत जुटाने के बुनियादी मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की खास सिफारिश के बावजूद अंग व्यापार के एंगल की जांच नहीं की गई। जांच एजेंसियों की यह विफलता जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र और जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी की पीठ ने सोमवार को फैसले में कहा कि जिन मामलों में पंढेर और कोली को दोषी ठहराया गया, उनमें ये 'बेगुनाह' थे। कोर्ट ने जांच में खामियां बताते हुए यह भी कहा जांच में सुस्ती बरती गई और अंग व्यापार जैसे संगठित और गंभीर पहलु पर ध्यान देने के बजाय एक गरीब नौकर को फंसाने का आसान रास्ता चुना गया। पंढेर की वकील मनीषा भंडारी ने मीडिया को बताया कि पंढेर को छह में से दो मामलों में बरी किया गया है, जबकि कोली को सभी मामलों से रिहाई मिल गई है। पंढेर और कोली की याचिका पर हाईकोर्ट ने पिछले महीने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोप था कि 2005 से 2006 के बीच पंढेर की कोठी में करीब 19 युवतियों और बच्चों की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। बाद में शवों को टुकड़े-टुकड़े कर ठिकाने लगा दिया गया। पंढेर की कोठी में कोली नौकर था।
रेप और हत्या के बाद मांस पकाकर खाया
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में पंढेर की कोठी के पास 2006 में नर कंकाल और बच्चों के कपड़े पाए जाने के बाद इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ। पंढेर और कोली को गिरफ्तार कर लिया गया था। आरोपों के मुताबिक कोली बच्चों को मिठाई और चॉकलेट का लालच देकर मकान में बुलाता था। उसने कई युवतियां की रेप के बाद हत्या कर दी। निचली अदालत में उसने शवों के साथ भी बलात्कार और इंसान का मांस पकाकर खाने की बात कबूल की थी।
19 केस दर्ज किए थे सीबीआइ ने
दोनों पर सीबीआइ ने 19 मामले दर्ज किए थे। कोली पर हत्या, अपहरण, बलात्कार, सबूतों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था, जबकि पंढेर पर अनैतिक तस्करी का आरोप था। इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा। स्थानीय लोगों का कहना था कि पुलिस लापता युवतियों और बच्चों की तलाश में नाकाम रही, क्योंकि शिकायत करने वाले गरीब थे। मामले के पीडि़त परिवार निठारी गांव में रहते थे, इसलिए मामला 'निठारी कांड' के नाम से सुर्खियों में रहा।