scriptShri Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Masjid dispute | श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश कॉपी मथुरा कोर्ट में की गई जमा, जानिए वजह | Patrika News

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश कॉपी मथुरा कोर्ट में की गई जमा, जानिए वजह

इस मुकदमे में यह दावा किया गया है कि यह केशव देव मंदिर कटरा के 13.37-एकड़ परिसर के भीतर देवता के जन्मस्थान पर बनाया गया है मीडिया से बात करते हुए याचिकाकर्ता यादव और उनके वकील दीपक शर्मा ने पुष्टि की कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल कर दी है और कोर्ट ने उन्हें 1 जुलाई को इसे पेश करने के लिए कहा है, जिस दिन वह मामले की सुनवाई करेगा।

इलाहाबाद

Published: May 25, 2022 07:33:09 pm

प्रयागराज: श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश कॉपी को मथुरा कोर्ट में जमा की गई। मामले में कोर्ट के इस आदेश में स्थानीय अदालत को उसके समक्ष लंबित दो आवेदनों पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है, जो कि श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद के संबंध में चार महीने के भीतर दायर किये गए हैं। आदेश की कॉपी वादी मनीष यादव द्वारा कोर्ट में जमा करवाई गई है, जिन्होंने शाही ईदगाह मस्जिद को स्थानांतरित करने के लिए मथुरा कोर्ट के समक्ष एक मुकदमा दायर किया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश कॉपी मथुरा कोर्ट में की गई जमा, जानिए वजह
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश कॉपी मथुरा कोर्ट में की गई जमा, जानिए वजह
इस मुकदमे में यह दावा किया गया है कि यह केशव देव मंदिर कटरा के 13.37-एकड़ परिसर के भीतर देवता के जन्मस्थान पर बनाया गया है। मीडिया से बात करते हुए याचिकाकर्ता यादव और उनके वकील दीपक शर्मा ने पुष्टि की कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल कर दी है और कोर्ट ने उन्हें 1 जुलाई को इसे पेश करने के लिए कहा है, जिस दिन वह मामले की सुनवाई करेगा।
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जस्टिस सलिल कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश भगवान श्री कृष्ण विराजमान और एक अन्य की याचिका पर इस प्रकार देखते हुए जारी किया था। इसके साथ ही कोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन), मथुरा को निर्देश किया कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति पेश करने की तारीख से चार महीने की अवधि के भीतर और प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, यदि उपरोक्त आवेदनों पर निर्णय लेने में कोई कानूनी बाधा न हो तो उपरोक्त आवेदनों पर शीघ्रता से निर्णय लें।

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