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रंग लाए इनके प्रयास और बदल गई सरकारी स्कूल की तस्वीर

सीनियर माध्यमिक विद्यालय दिवाकारी का भवन, वहां दीवारों पर हो रही चित्रकारी, सफाई और मूलभूत सुविधाओं सहित अनुशासन देखकर लगता ही नहीं यह सरकारी विद्यालय है। वह किसी सुप्रबंधित निजी विद्यालय सा नजर आता है।

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aniket soni

Oct 07, 2016

सीनियर माध्यमिक विद्यालय दिवाकारी का भवन, वहां दीवारों पर हो रही चित्रकारी, सफाई और मूलभूत सुविधाओं सहित अनुशासन देखकर लगता ही नहीं यह सरकारी विद्यालय है। वह किसी सुप्रबंधित निजी विद्यालय सा नजर आता है। वर्तमान में यहां 600 से अधिक नामांकन है और कक्षा दसवीं में अंग्रेजी जैसे कठिन विषय में परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है।

कुछ वर्ष पूर्व यह अंसभव लगता था, लेकिन यहां एक वर्ष से कार्यरत संस्था प्रधान डॉ. अनुरिता झा के अथक प्रयासों से व समर्पण से यह संभव हो पाया है। उन्होंने स्कूल में कार्यभार ग्रहण करने के बाद यहां मूलभूत सुविधाओं का विकास किया। यहां व्याख्याताओं की कमी थी तो इनके पति डॉ. अशोक शर्मा ने दसवीं कक्षा के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया जिसके कारण इस विषय में बच्चों का परीक्षा परिणाम शत: प्रतिशत रहा।

विद्यालय के परीक्षा परिणाम में सुधार आया तो यहां विद्यार्थियों की संख्या 400 से बढ़कर 655 तक पहुंच गई। अब यहां बेटियां स्कूल आने में नहीं झिझकती हैं और वे स्कूल की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों से बेटियों को स्कूल भेजने का आह्वान किया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चाणक्य लाल शर्मा का कहना है कि दिवाकरी स्कूल में सकारात्मक कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इनकी ओर से स्कूल की तस्वीर बदलने पर अलवर ग्रामीण विधायक जयराम जाटव आगे आए और उन्होंने वहां कई सुविधाएं मुहैया करवाई।

डॉ. अनुरिता ने कत्थक की विधिवत शिक्षा ली और संगीत में उन्होंने स्नातकोत्तर डिग्री ली। इसके अलावा वे एमएससी, एमएड और एमफिल कर चुकी। उन्हें देश के कई ख्यातिनाम पुरस्कार मिले हैं, जिनमें 2009 में युवा सांस्कृतिक संघ की ओर से राष्ट्रीय नृत्य शिरोमणी आवार्ड प्रमुख है।
यही नहीं 2011 में हिन्दुस्तान कत्थक सोसायटी की ओर से इन्हें राष्ट्रीय रत्न अवार्ड प्रदान किया गया। इन्होंने यूनेस्को की ओर से पूना में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इनकी इस प्रतिभा का लाभ बालकों को मिल रहा हैं।

वे स्कूली प्रतिभावान बालिकाओं को आगे आने के लिए मंच प्रदान कर रही हैं। वे यहां की गरीब प्रतिभाशाली बालिकाओं को नृत्य भी सीखाती हैं। इस विद्यालय की बालिकाएं अपनी प्रतिभा का परिचय जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में दे चुकी हैं।

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