
ज्योति शर्मा
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/अलवर। आज मैं जहां हूं, जो कुछ भी हूं। उसके पीछे मेरी मां का हाथ है। यह वही हैं, जिन्होंने कभी मुझे कमजोर नहीं पड़ने दिया। वे खुद कभी कमजोर नहीं पड़ीं। कभी परिस्थितियों से हारी नहीं। मेरी मां ने दिन-रात मेहनत-मजदूरी करके मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह कहना है अलवर के पैरा ओलंपिक खिलाड़ी सुनील साहू का, जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद कई पदक जीते। उनका कहना है, 2012 में उनके बड़े भाई का देहांत हो गया। इतना ही नहीं एक साल बाद 2013 में उनका एक्सीडेंट हो गया। इसी साल पापा का देहांत हो गया। उसके कुछ ही समय बाद बड़ी बहन का देहांत भी हो गया। उस दौर में वह पूरी तरह से टूट चुके थे। लेकिन दुखों का पहाड़ टूटने के बाद भी उनकी मां ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने एक बार फिर से मुझे यही शिक्षा देकर मजबूत बनाया कि हारने और हार मान लेने में बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्होंने ही मुझमें साहस भरा।
सब कुछ आज मां की ही बदौलत है: राजस्थान सरकार अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस पर सुनील को विशेष योग्यजन पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। उन्होंने बताया, मेरा तृतीय श्रेणी अध्यापक के लिए चयन हुआ है। मेरे इस सफर में बड़ी भूमिका मेरी मां की रही है। खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पैरा एथलीट सुनील कुमार साहू को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मानित कर चुके हैं। वे कहते हैं, सब मां की बदौलत है।
मां के ऊपर आ गई पूरी जिम्मेदारी: सुनील ने बताया, आइसक्रीम फैक्ट्री का बिजनेस था, लेकिन पापा के चले जाने से वह बंद हो गया। घर में कमाने वाला कोई और नहीं था। सारी जिम्मेदारियां मां के ऊपर आ गई। मेरी ख्वाहिश थी खेलों में आगे जाऊं। उस वक्त मां डटकर मेरे साथ खड़ी हो गईं। वे मेरी पथप्रदर्शक भी बनीं और सहारा भी। मां ने घरों में सफाई कर और बर्तन साफ कर मेहनत मजदूरी की और प्रशिक्षण के लिए स्टेडियम भेज दिया। साल 2018 में मैंने जिले स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया। 2022 में मैंने सवाई मानसिंह स्टेडियम जयपुर में आयोजित राज्य स्तर प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक हासिल किए और राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता के लिए भी मेरा चयन हो गया। मैंने 100 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया।
Published on:
03 Sept 2023 01:11 pm
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