
भाषा के आधार पर भेदभाव! प्राइवेट स्कूल पर 1 लाख का जुर्माना, निजी स्कूल पर बड़ी कार्रवाई(photo-patrika)
Ambikapur School Case: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में भाषा के आधार पर एक बच्चे को प्रवेश देने से इनकार किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल जांच के आदेश दिए। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई और संबंधित तथ्यों की पुष्टि की गई।
जांच में सामने आया कि चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) ने 4 वर्षीय बच्चे को इस आधार पर प्रवेश देने से मना कर दिया कि वह हिंदी नहीं बोल पाता और केवल सरगुजिहा भाषा में बात करता है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने यह भी कहा कि यहां “बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं” और शिक्षक बच्चे की बात नहीं समझ पाएंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत है। इसे स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण और अनुचित माना गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित संस्था बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रही थी। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने अपनी गलती स्वीकार की है। मामले की जांच के लिए रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर की अध्यक्षता में गठित टीम ने भी घटना की पुष्टि की। साथ ही स्कूल के बिना मान्यता संचालन की जानकारी भी सामने आई।
अधिकारियों ने इसे निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का स्पष्ट उल्लंघन माना है। जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित संस्था की यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के खिलाफ थी और शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
नियमों के उल्लंघन के चलते स्वरंग किड्स एकेडमी पर 1 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। साथ ही संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश दिया है कि जुर्माना राशि शासन के खजाने में जमा की जाए। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
Published on:
19 Apr 2026 09:20 am
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