China's Big Move Against US: अमरीका और चीन के बीच हमेशा से ही प्रतिद्वंद्विता रही है, पर पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास देखने को मिली है। हाल ही में चीन ने अमरीका के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। क्या है चीन का वो कदम? आइए जानते हैं।
अमरीका (United States Of America) और चीन (China) को दुनिया की दो सबसे बड़ी सुपर-पावर्स माना जाता है। दोनों विकसित देशों में लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता रही है जो अब प्रतिद्वंद्विता के स्तर से ऊपर जा चुकी है। अमरीका और चीन के संबंधों में पिछले कुछ साल में खटास देखने को मिली है। दोनों ही देश इस बात को सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वो सबसे आगे रहे। ऐसे में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने का मौका कोई भी नहीं छोड़ता। हाल ही में चीन ने अमरीका के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। इससे अमरीका को काफी नुकसान हो सकता है।
अमरीका के बुनियादी ढांचे पर चीन का बड़ा साइबर अटैक
हाल ही में अमरीका की खुफिया एजेंसियों और टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने इस बात की जानकारी दी है कि चीन के कुछ हैकर्स ने अमरीका के बुनियादी ढांचे पर बड़ा साइबर अटैक किया है। जानकारी के अनुसार चीन की तरफ से इस साइबर अटैक जो जिन चाइनीज़ हैकर्स ने अंजाम दिया है उन्हें चीन की सरकार से पूरा समर्थन मिला हुआ है।
साइबर अटैक के पीछे है किसका हाथ?
अमरीकी खुफिया एजेंसियों के साथ ही दूसरे कुछ देशों की खुफिया एजेंसियों और माइक्रोसॉफ्ट ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि चीन की तरफ से अमरीका के बुनियादी ढांचे पर साइबर अटैक के लिए वोल्ट टायफून (Volt Typhoon) नाम का हैकिंग ग्रुप ज़िम्मेदार है। यह हैकिंग ग्रुप 2021 के मिड से ही इस तरह की गतिविधियों में एक्टिव है।
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किस सेक्टर पर हुआ मुख्य रूप से साइबर अटैक?
जानकारी के अनुसार चीन के हैकिंग ग्रुप वोल्ट टायफून ने अमरीका के कम्युनिकेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया। इन हैकर्स का उद्देश्य मुख्य रूप से अमरीकी जांच एजेंसियों और अमरीकी आर्मी के कार्य को प्रभावित करना और ज़रूरी सूचना चुराना था। साइबर अटैक के ज़रिए वोल्ट टायफून ने अमरीका के कम्युनिकेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक्सेस पाने की कोशिश की। इसमें उन्हें कितनी कामयाबी मिली, इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, पर सच होने पर यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है।
चीन ने किया इनकार
अमरीका के बुनियादी ढांचे पर साइबर अटैक के दावे को चीन ने बेबुनियाद बताया। चीन ने इस दावे को राजनीतिक प्रोपेगंडा बताते हुए इसका खंडन किया।
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