
अमरीकी स्वाधीनता संग्राम की प्रमुख घटनाएं
नई दिल्ली। 4 जुलाई को संयुक्त राज्य अमरीका के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।मानव की प्रगति में अमरीका के स्वतंत्रता संग्राम को एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इस क्रांति के फलस्वरूप नई दुनिया में न केवल एक नए मजबूत देश का जन्म हुआ बल्कि मानव जाति के इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। अमरीका के स्वतंत्रता संग्राम का महत्व विश्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। इस क्रांति का प्रभाव अमेरिका, इंग्लैंड सहित पूरे दुनिया के दूसरे देशों पर भी पड़ा।
इसलिए भड़का अमरीकी स्वतंत्रता संघर्ष
अमरीका का स्वतंत्रता संग्राम किसी तात्कालिक घटना का परिणाम नहीं था। बल्कि ऐसी कई घटनाएं जिम्मेदार थीं जिन्होंने अमरीकी लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वह ब्रिटिश दासता का जुआ अपने उत्तर कर फेंके दें और अपनी स्वाधीनता की घोषणा कर दें।
ग्रेनविले की नीति
ब्रिटिश शासक जार्ज तृतीय ने इंग्लैंड की संसद की अपनी कठपुतली बनाए रखने का सफल प्रयास किया तथा औपनिवेशक कानूनों को कड़ाई से लागू करने की बात की। इसके समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री गे्रनविले ने इन कानूनों को कड़ाई से लागू करने का प्रयास किया। सप्तवर्षीय युद्ध में के आर्थिक संकट में उलझने के बाद गे्रनविले ने करों को बढ़ाने के लिए नवीन योजना प्रस्तुत की जिसके तहत् उसने जहाजरानी कानूनों की सख्ती से लागू करने तथा उपनिवेशों पर प्रत्यक्ष कर लगाने की बात की। इसी संदर्भ में उसने सुगर और स्टाम्प एक्ट पारित किया।
सुगर एक्ट
इसके तहत् इंग्लैंड के अतिरिक्त अन्य देशों से आने वाली विदेशी शराब का आयात बंद कर दिया गया तथा शीरे पर आयात कर बढ़ा दिया गया। इससे अमरीकी उपनिवेशों के आर्थिक हितों को चोट पहुंच रही थी। क्योंकि न तो उन्हें सस्ते दामों पर शक्कर मिल पा रही थी थे और न रम बनाने के लिए वह शीरा ही खरीद सकते थे।
स्टैम्प एक्ट
इसके अनुसार समाचार-पत्रों, कानूनी तथा व्यापरिक दस्तावेजों, विज्ञापनों आदि पर स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान अनिवार्य कर दिया गया। इसका उल्लंघन करने वालों के लिए कड़ी सजा की व्यवस्था की गई। उपनिवेशों में इस एक्ट के विरोध में व्यापक आंदोलन हुआ। अमरीकी यह मानते थे कि इंग्लैंड की सरकार बाह्य कर लगा सकती है लेकिन आंतरिक कर केवल स्थानीय मंडल ही लगा सकते है। इसी दौरान 'प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं' का नारा उछाला गया। स्टैम्प ऐक्ट के विरोध में अक्टूबर 1765 में नौ उपनिवेशों ने मिलकर स्टैम्प ऐक्ट कांग्रेस का अधिवेशन किया। स्टाम्प एक्ट के इस प्रकरण ने अमरीकियों को उकसाने में एक शक्तिशाली उत्पे्ररक की भूमिका अदा की।
लॉड नार्थ की चाय नीति
1773 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी को वित्तीय संकट से उबारने के लिए ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री लॉर्ड नार्थ ने यह कानून बनाया कि ईस्ट इंडिया कंपनी सीधे ही अमरीका में चाय बेच सकती है। कंपनी के जहाजों को इंग्लैंड के बंदरगाहों पर आने और चुंगी देने की आवश्यकता नहीं थी। अमरीकी उपनिवेश में इस चाय नीति का जमकर विरोध हुआ और कहा गया कि “सस्ती चाय” के माध्यम से इंग्लैंड बाहरी कर लगाने के अपने अधिकार को बनाए रखना चाहता था। अतः पूरे देश में चाय योजना के विरूद्ध आंदोलन शुरू हो गया।
बोस्टन चाय पार्टी
16 दिसम्बर 73 को सैमुअल एडम्स के नेतृत्व में बोस्टन बंदरगाह पर ईस्ट इंडिया कम्पनी के जहाज में भरी हुई चाय की पेटियों को समुद्र में फेंक दिया गया। इतिहास में इस घटना को बोस्टन टी पार्टी कहा जाता है। इस घटना में ब्रिटिश संसद के सामने एक कड़ी चुनौती उत्पन्न की। अतः ब्रिटिश सरकार ने अमेरिकी उपनिवेशवासियों को सजा देने के लिए कठोर एवं दमनकारी कानून बनाए। बोस्टन बंदरगाह को बंद कर दिया गया।
ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए इन दमनात्मक कानूनों का अमेरिकी उपनिवेशों में जमकर विरोध किया और 1774 ई. फिलाडेल्फिया में पहली महाद्वीपीय कांगे्रस की बैठक हुई। ब्रिटिश संसद से इस बात की मांग की गई कि उपनिवेशों में स्वशासन बहाल किया जाय और औपनिवेशिक मामलों में हस्तक्षेप का प्रयास न किया जाय। यह प्रयास विफल हो गया और ब्रिटिश सरकार तथा उपनिवेशवासियों के बीच युद्ध प्रारंभ हो गया। 19 अपै्रल 1775 को लेक्सिंगटन में पहला संघर्ष हुआ। इसके साथ ही अमरीकी स्वतंत्रता संग्राम का आरंभ हो गया।
Published on:
04 Jul 2018 03:12 pm
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