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नासा 82 अरब रुपए खर्च कर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन प्रशांत महासागर में गिराएगा

विदाई की तैयारी : पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया गया था 1998 में

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नासा 82 अरब रुपए खर्च कर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन प्रशांत महासागर में गिराएगा

नासा 82 अरब रुपए खर्च कर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन प्रशांत महासागर में गिराएगा

वॉशिंगटन. अंतरिक्ष यात्रियों का दूसरा घर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आइएसएस) अगले कुछ साल में विदा ले लेगा। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक स्पेस स्टेशन 2030 तक ही सेवाएं दे पाएगा। इसके बाद 2031 में इसे सुरक्षित तरीके से प्रशांत महासागर में गिरा दिया जाएगा। इस योजना पर करीब 82 अरब रुपए (एक बिलियन डॉलर) खर्च किए जाएंगे।कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 2030 तक अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन के लिए प्रतिबद्धता जताई है। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने 2028 तक अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन के लिए प्रतिबद्धता जताई है। गौरतलब है कि 1998 से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा है। यह पूरी पृथ्वी को मॉनिटर करते हुए अंतरिक्ष से जुड़े मिशनों को पूरा करता है। यह कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (सीएसए), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए), रोस्कोस्मोस और नासा समेत 5 एजेंसियों के सहयोग से चलाया जाता है।

गिराया जाएगा स्पेसक्राफ्ट से

नासा के मुताबिक 109 मीटर चौड़े आइएसएस को अंतरिक्ष में खत्म करना मुश्किल है, क्योंकि यह आकार में काफी बड़ा है। इसे खत्म करने के लिए यूएस डोरबिट व्हीकल (यूएसडीवी) नाम के स्पेसक्राफ्ट का निर्माण किया जाएगा। स्पेसक्राफ्ट आइएसएस को पृथ्वी की कक्षा से हटाकर नीचे लाएगा। इसे नियंत्रित तरीके से प्रशांत महासागर में गिराया जाएगा।

बदल गए रिश्ते

आइएसएस के निर्माण में अमरीका और रूस ने महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। दोनों देशों के संबंध कई मामलों को लेकर बिगड़ चुके हैं। हालांकि आइएसएस को लेकर दोनों में सहयोग जारी है। यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों की बीच हालात और बिगड़ गए हैं। आइएसएस को नष्ट करने के लिए दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा।