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अब अंतरिक्ष में हीरा, माणिक और सोने की तलाश

साइकी अभियान : छह साल में क्षुद्रग्रह पर पहुंचेगा नासा का विमान  

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अब अंतरिक्ष में हीरा, माणिक और सोने की तलाश

अब अंतरिक्ष में हीरा, माणिक और सोने की तलाश

वॉशिंगटन. दुनिया के देश धरती के गर्भ में हीरा, माणिक और सोने की तलाश कर ही रही हैं अब उनकी खोज अंतरिक्ष में भी शुरू हो गई है। अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा ने स्पेस एक्स कंपनी के जरिए 16 साइकी क्षुद्रग्रह के लिए शुक्रवार को कैनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष यान को रवाना किया। नासा का अनुमान है कि इस क्षुद्रग्रह पर हीरा, माणिक, सोने जैसी कीमती धातुओं का खजाना भरा पड़ा है। इसी क्षुद्रग्रह के नाम पर नासा ने यह साइकी अभियान शुरू किया है। यह अंतरिक्ष यान छह साल की यात्रा के बाद साइकी पर पहुंचेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक साइकी पर मौजूद धातुओं की कीमत इतनी है कि दुनिया का हर आदमी अरबपति हो सकता है। वहीं नासा के वैज्ञानिकों का दावा है कि साइकी की संरचना अन्य क्षुद्रग्रह की तुलना में अलग है। यह ग्रहों के बनने की शुरुआती अवस्था में उनके क्रोड़ से निकली धातु से बना होना चाहिए। ऐेसे में साइकी से मिली जानकारी अंतरिक्ष और ग्रहों से जुड़े कई राज खोल सकेगी।

पृथ्वी से 3.5 अरब किमी दूर है साइकी

साइकी क्षुद्रग्रह की खोज इटली के खगोलविद एनिबेले डी गास्पेरिस ने की थी। उस समय यह खोजा गया 16वां क्षुद्रग्रह था, इसलिए इसे 16 साइकी कहा जाता है। यह नाम पुरातन ग्रीक मिथक में आत्मा की देवी के नाम पर रखा गया था। इसकी संरचना आलू के आकार जैसी है। साइकी पृथ्वी से 3.5 अरब किलोमीटर दूर मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद है। साइकी की सतह का क्षेत्रफल करीब 165800 वर्ग किलोमीटर है।

बड़ा सवाल

वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य तौर पर क्षुद्रग्रह पर कार्बन, पानी और अन्य पदार्थ होते हैं। ये पदार्थ ग्रह बनने के समय बने थे। इनमें धातुएं नहीं होती हैं। ऐसे में इस क्षुद्रग्रह पर यह धातुएं कहां से आई, यह बड़ा सवाल है। साइकी मिशन यह राज खोलने में कामयाब होता है तो दुनिया के लिए बड़ी सफलता होगी।