वॉशिंगटन। अमरीका के एक शीर्ष रिपब्लिकन सेनेटर ने राष्ट्रपति से भारत को अमरीका के वैश्विक रणनीतिक एवं रक्षा भागीदार के तौर पर मान्यता देने को कहा है। इस आशय का एक विधेयक पेश कर उन्होंने कहा कि भारत और अमरीका के सामने मौजूद सुरक्षा संबंधी साझा खतरे और रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है।
रक्षा निर्यात नियंत्रण नियमनों में आवश्यक बदलाव की मांग करते हुए सीनेट की शस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष जॉन मक्केन ने नैशनल डिफेन्स ऑथराइजेशन ऐक्ट (NDAA) 2017 में विधायी संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किए जाने के एक दिन बाद उठाया गया। मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा सहयोग का आह्वान किया था।
सेनेट संशोधन 4618 के अनुसार, कांग्रेस की यह भावना है कि अमरीका और भारत के सामने सुरक्षा संबंधी साझा खतरे हैं और रक्षा भागीदारी को मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है।
संशोधन में कहा गया है कि अमरीका और भारत के बीच संबंध बीते दो दशकों में विकसित हो कर बहुपक्षीय, वैश्विक रणनीतिक और रक्षा भागीदारी वाले बन गए हैं जिनकी जड़ें साझा लोकतांत्रिक मूल्यों में, परस्पर समृद्धि, व्यापक आर्थिक भागीदारी, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ाने में हैं।
इसमें कहा गया है कि ऐसी कार्रवाइयां रक्षा निर्यात नियंत्रण नियमनों में समुचित बदालाव के माध्यम से भारत को अमरीका के रणनीतिक भागीदार और रक्षा भागीदार के तौर पर मान्यता देेने के लिए शायद जरूरी हो सकती हैं।