बनासकांठा जिले की रमीलाबेन की कहानी : ‘दीपक की बाती’ से शुरूआत, एक वर्ष में आय एक लाख के पार, -तापी में पारंपरिक आदिवासी भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट का सालाना टर्नओवर 41 लाख रुपए
Ahmedabad. सखी मंडल के कारण हमें जीने के लिए ऑक्सीजन मिली, यह कहना है बनासकांठा जिले के अलवाडा गांव निवासी रमीलाबेन मुकेश जोशी का, जिन्होंने वर्ष 2024 में दीपक की बाती बनाने का काम शुरू कर केवल एक वर्ष में 1 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में ‘लखपति दीदी’ योजना शुरू की गई थी। योजना का उद्देश्य 2027 तक तीन करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।गुजरात की महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना का अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में किए गए प्रयास के चलते 1 लाख 50 हजार महिलाओं की आय एक लाख रुपए से अधिक हुई है। वे गुजरात की ‘लखपति दीदी’ बनी हैं। पूरे देश में 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के मुकाबले गुजरात 10 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लखपति दीदी योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं ग्रामीण महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने को सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वार्षिक आय एक लाख से अधिक हो सके। योजना के तहत महिलाएं कृषि, पशुपालन, हस्तकला और अन्य स्थानीय क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। सरकार इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ने की सुविधा देती है।
गुजरात में इस योजना के अंतर्गत 7,98,333 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 7,66,743 महिलाएं कृषि आधारित रोजगार से जुड़ी हैं, जबकि अन्य महिलाएं गैर-कृषि क्षेत्रों जैसे हस्तकला, उत्पादन, सेवाएं और अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों से आय अर्जित कर रही हैं।
गुजरात के आदिवासी बहुल जिलों में 30 हजार से ज्यादा लखपति दीदी बनी हैं। नवसारी, वलसाड और डांग जिले में 1,06,823 महिलाओं की पहचान की गई है। 30,527 महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपए से अधिक हो गई है।
तापी जिले की व्यारा तहसील के करंजवेल गांव में रमीलाबेन परषोत्तमभाई गामित सखी मंडल की 10 महिलाओं के साथ मिलकर वनश्री रेस्टोरेंट का संचालन करती हैं। सरकार की ओर से उन्हें रेस्टोरेंट के लिए स्थान और उपकरण-संसाधन दिए गए। रमीलाबेन ने बताया कि, हम पिछले चार वर्षों से रेस्टोरेंट चला रहे हैं। किराना सहित अन्य आवश्यक सामानों के लिए 50 हजार रुपए का ऋण मिला था। हमने वह ऋण भी चुका दिया है। हम अपने रेस्टोरेंट में पारंपरिक आदिवासी व्यंजन परोसते हैं। इससे प्रतिमाह साढ़े तीन से चार लाख रुपए तक की आय अर्जित करते है। वर्ष 2023 में टर्नओवर 40 लाख था, जो 2024 में बढ़कर 41 लाख 88 हजार रुपए हो गया है।