एक बार ब्लेड मारने पर 10 रुपए देने के वीडियो गेम से प्रेरित होकर दिया अंजाम राजकोट. अमरेली जिले की बगसरा तहसील के मोटा मुंजियासर गांव के प्राथमिक स्कूल में 40 छात्रों के हाथ-पैर पर ब्लेड से जख्म के निशान मिले। छात्रों ने पेंसिल छीलने के शॉर्पनर की ब्लेड से खुद को चोट पहुंचाई। बताया […]
राजकोट. अमरेली जिले की बगसरा तहसील के मोटा मुंजियासर गांव के प्राथमिक स्कूल में 40 छात्रों के हाथ-पैर पर ब्लेड से जख्म के निशान मिले। छात्रों ने पेंसिल छीलने के शॉर्पनर की ब्लेड से खुद को चोट पहुंचाई। बताया जा रहा है कि एक वीडियो गेम से प्रेरित होकर छात्रों ने ऐसा किया, जिसमें एक जख्म के बदले 10 रुपए देने की बात कही गई थी। इस घटना से अभिभावकों में गहरी चिंता है। छात्रों को टिटनेस के टीके लगाए गए हैं।
परिजन ने बगसरा पुलिस को भेजे गए पत्र में लिखा कि 19 से 22 मार्च के दौरान स्कूल में 40-50 बच्चों ने ब्लेड से हाथ-पैर काटने का प्रयास किया। यह घटना स्कूल के समय में हुई। छात्रों से उनके परिजन ने पूछा तो बच्चों ने कहा कि शिक्षकों ने कुछ भी बताने से मना कर दिया है। स्कूल के प्राचार्य से पूछने पर उन्होंने कहा कि हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होती और हम इस घटना से अनजान हैं।
जानकारी मिलने के बाद जब अभिभावक स्कूल पहुंचे तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। ग्राम पंचायत के सरपंच जयसुख खेताणी ने बगसरा पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए जांच की मांग की। शिकायत में कहा गया कि यह स्पष्ट किया जाए कि छात्रों ने खुद को घायल किया या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसा करने के लिए उकसाया।
स्कूल की प्राचार्य हर्षा मकवाणा ने बताया कि बच्चों ने गेम खेलते समय खुद को ब्लेड से घायल किया। उन्होंने कहा कि एक घाव करने पर 10 रुपए देने के वीडियो गेम से प्रेरित होकर छात्रों ने यह कदम उठाया। इस घटना की जानकारी उनके परिजनों को दे दी गई है।
शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि, राज्य सरकार अमरेली जिले की घटना को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने इसे समाज के लिए एक चेतावनी बताते हुए कहा कि डिजिटल युग में बच्चों की मानसिक सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पानशेरिया ने बताया कि शिक्षा विभाग सभी स्कूलों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, संवेदनशील निगरानी और बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों को समझने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि, वे बच्चों से संवाद करें, उन्हें सुने और केवल मोबाइल छीनने जैसी सतही कोशिशों की बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य को समझने का प्रयास करें। राज्य सरकार सभी जिलों में विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है।