
Ahmedabad. गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सेशंस कोर्ट को बम से उड़ाने की ई-मेल से धमकी देने के मामले में शहर साइबर क्राइम ब्रांच और सूरत क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर की सूचना पर 48 घंटे के भीतर चेन्नई (तमिलनाडु) से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
शहर पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि पकड़े गए आरोपियों में मुख्य आरोपी सूरत में लालगेट निवासी मो.अस्फाक अंसारी (28) और मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की थानला तहसील के दौलतपुरा गांव और वर्तमान में सूरत के अडाजण गाम निवासी राजेश उर्फ राज मुनिया (33) को चेन्नई से गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में चेन्नई एटीएस की भी मदद ली गई।
गहलोत ने बताया कि मुख्य आरोपी अस्फाक सूरत सेशंस कोर्ट में चल रहे केस की सुनवाई से बचना चाहता था। 5 सितंबर को उसकी कोर्ट में पेशी थी। कोर्ट कार्यवाही बाधित करने और पेशी से बचने के लिए उसने साथी राजेश के साथ मिलकर साजिश रची। 27 अगस्त को मुंबई से चेन्नई जाने वाली ट्रेन में यात्रा के समय उसने एक फर्जी ई-मेल आईडी सत्तवानगुप्ताएटजीमेलडॉटकॉम तैयार की। 5 सितंबर सुबह 11.57 बजे तथा 11.59 बजे गुजरात हाईकोर्ट के आधिकारिक मेल आईडी पर ( बम आरडीएक्स अहमदाबाद एवं सूरत कोर्ट में आज बम धमाका होगा) लिखकर धमकी भरे ई-मेल भेजे। ऐसा ई-मेल मिलने पर इन दोनों कोर्ट के अलावा शहर के सभी कोर्ट में बीडीडीएस, डॉग स्क्वॉड टीमों ने जांच की। साइबर क्राइम ब्रांच में एफआइआर दर्ज करते हुए जांच शुरू करने पर आरोपियों की लोकेशन चेन्नई मिली।
गहलोत ने कहा कि अस्फाक को 512 ग्राम हाइब्रिड गांजा के मामले में 2022 में दर्ज केस में 2024 में पकड़ा था। इस मामले में इसने काफी प्रयास किया लेकिन जमानत नहीं मिली। इसके बाद हाईकोर्ट से भी जमानत नहीं मिली। ऐसे में जब वह पेरोल पर बाहर आया तो उसके बाद वापस जेल में हाजिर नहीं हुआ और 29 अक्टूबर 2025 से फरार हो गया। सूरत की लाजपोर जेल में रहने के दौरान इसकी मुलाकात सह-आरोपी राजेश से हुई थी।राजेश को एमडी ड्रग्स के मामले में 2024 में पकड़ा था।
पूछताछ में सामने आया कि दोनों गांजा, हाइब्रिड गांजा सप्लायर की तलाश में चेन्नई गए थे। वहां से गांजा लाकर सूरत में बेचने की योजना थी। पुलिस से बचने को लगातार होटल बदलते, फर्जी नाम, पता और सिमकार्ड का उपयोग करते थे। वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करते प्रोक्सी और तकनीकी माध्यमों से वास्तविक आइपी एड्रेस और लोकेशन को छिपाते थे। चलती ट्रेन से ई-मेल भेजा ताकि सही लोकेशन का पता न चल सके। अस्फाक मोबाइल की दुकान चलाता था जो तकनीक का जानकार है। इस मामले में यह जांच की जा रही है कि आरोपियों ने इससे पहले ऐसे ई-मेल तो नहीं भेजे हैं।