
सिविल अस्पताल में ब्रेनडेड मरीज के पास चिकित्सा कर्मी और अन्य लोग।
ahmedabad : अपनों को खोने का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन दिल्ली के 31 वर्षीय रोहित सिंह के परिवार ने इस असहनीय दुख को चार परिवारों के लिए उम्मीद में बदल दिया। अहमदाबाद में काम करने वाले रोहित सिंह के ब्रेनडेड होने के बाद उनकी मां और चार बहनों ने उनके अंगदान का संवेदनशील फैसला लिया। जिससे उनका लिवर, दो किडनी और पेंक्रियाज से चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की राह खुली है।
रोहित सिंह मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और वर्तमान में अहमदाबाद में काम करते थे। गत चार सितंबर की रात को शहर के हंसपुरा चौकड़ी के पास सड़क हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई। परिजन उन्हें 108 एंबुलेंस से उपचार के लिए सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। आइसीयू में चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। 5 सितंबर को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेनडेड घोषित किया।
इसके बाद सिविल अस्पताल की अंगदान टीम ने परिजनों को ब्रेनडेड अवस्था और अंगदान के महत्व की जानकारी दी। बेटे और भाई को खोने के गहरे सदमे के बीच मां और चार बहनों ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए अंगदान की सहमति दी। इनके इस निर्णय से उन लोगों को काफी लाभ होगा जो ब्रेनडेड अंग की प्रतिक्षा में लंबे समय से कतार में हैं। इन लोगों का अंग प्रत्यारोपण होगा तो उनके जीवन में काफी हद तक सुधार हो सकेगा।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि दान में मिले एक लिवर, दो किडनी और एक पेंक्रियाज का प्रत्यारोपण सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) अस्पताल में उपचाराधीन जरूरतमंद मरीजों में किया जाएगा।
सिविल अस्पताल में अब तक 254 ब्रेनडेड मरीजों के अंगों का दान किया जा चुका है। इनके माध्यम से अब तक 840 अंग तथा 202 आंखों और 49 त्वचा समेत कुल 251 ऊतक दान में मिल चुके हैं। इस तरह अस्पताल में अब तक कुल 1,091 अंगों और ऊतकों का दान हो चुका है। इन अंगों में सबसे अधिक किडनी दान में मिली हैं। इसके बाद लिवर और उसके बाद हृदय का दान मिला है। इनकी मदद से अनेक लोगों को नया जीवन मिल गया है।
Updated on:
07 Sept 2026 10:44 pm
Published on:
07 Sept 2026 10:43 pm
