
बारिश का फाइल फोटो।
अहमदाबाद. मानसून के अंतिम दौर में गुजरात में बारिश पर ब्रेक लगी हुई है। सितंबर के शुरुआती छह दिन लगभग सूखे बीते हैं। राज्य में इस दौरान औसतन महज 0.06 इंच बारिश हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में औसतन करीब 2.8 इंच बरसात दर्ज हुई थी। इस बार सितंबर के पहले छह दिनों में पिछले साल के मुकाबले करीब 98 फीसदी कम बारिश हुई है। लगातार बारिश नहीं होने से प्रभावित क्षेत्रों में मूंगफली, कपास और अन्य खरीफ फसलों पर नमी की कमी का असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।पूरे मानसून की स्थिति भी पिछले साल के मुकाबले कमजोर है। इस साल अब तक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7.3 इंच बारिश कम हुई है।
जिलावार आंकड़े बताते हैं कि देवभूमि द्वारका में सामान्य की सिर्फ 6.41 फीसदी, पोरबंदर में 18.12 फीसदी, जामनगर में 28.88 फीसदी, कच्छ में 29.49 फीसदी, गिर सोमनाथ में 46.67 फीसदी और राजकोट में भी 47.11 फीसदी ही बारिश हुई है। इसके उलट दक्षिण गुजरात में मानसून की स्थिति बेहतर रही है। इस क्षेत्र में अब तक सामान्य की 104.05 फीसदी बारिश दर्ज हुई है। नवसारी में 122.62 फीसदी और वलसाड में 117.46 फीसदी बारिश हुई है। मध्य गुजरात में 75.08 फीसदी और उत्तर गुजरात में 56.23 फीसदी बारिश दर्ज हुई है।अहमदाबाद में 6 सितंबर तक मानसून की कुल बारिश करीब 24.6 इंच रही है, जो सामान्य की 75.79 फीसदी है।
मौसम विभाग ने 7 से 13 सितंबर तक गुजरात के अधिकांश जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। व्यापक और लगातार बारिश की संभावना नहीं है। कुल मिलाकर इस बार फसलों की दृष्टि से भी बारिश कम हुई है। इसके चलते फसलों में पानी की चाहत हुई है। उन जगहों पर यह चाहत ज्यादा है जहां बारिश के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। इन जगहों पर किसानों को बारिश का इंतजार है। हालांकि दक्षिण गुजरात में बारिश तुलनात्मक रूप से ज्यादा हुई है। रीजन के आधार पर कच्छ में बहुत कम बारिश हुई है। कम बारिश के कारण राज्य में अभी तक बांधों में भी पिछले वर्ष के मुकाबले पानी का संग्रह कम है।
Updated on:
06 Sept 2026 10:39 pm
Published on:
06 Sept 2026 10:39 pm
