गुजरात राज्य स्कूल संचालक महामंडल की ओर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा है। उसमें मांग की है कि 20 जून तक स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां बढ़ाई जाएं।
गुजरात में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। आगामी दो सप्ताह तक भीषण गर्मी और हीटवेव से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इसे देखते हुए गुजरात राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश को एक सप्ताह बढ़ाने की मांग की गई है।
गुजरात राज्य शाला संचालक महामंडल की ओर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को इस संबंध में शनिवार को पत्र लिखा गया है। इसमें मांग की गई है कि स्कूलों का ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 जून तक बढ़ाया जाए। ऐसा होने से बच्चों को राहत मिलेगी।महामंडल के अध्यक्ष भास्कर पटेल, मनू रावल एवं प्रमुख डॉ.शंकर सिंह राणा की ओर से लिखे पत्र में कहा है कि बीते 15 दिनों से अहमदाबाद सहित गुजरात के सभी जिलों में रेड अलर्ट व ऑरेंज अलर्ट घोषित करना पड़ा। लोग गर्मी से बेहाल रहे। इतना ही नहीं आगामी दो सप्ताह भी 40 से 42 डिग्री के बीच पारा रहने की संभावना जताई जा रही है।
गर्मी के चलते उत्तरप्रदेश में चुनावी कार्य में लगे 25 कर्मचारियों की मौत की खबर सामने आई है। ऐसी गंभीर स्थिति को देखते हुए गुजरात में जिला पंचायत, नगर पंचायत, महानगर पालिका, सरकार व ट्रस्टों की ओर से संचालित सरकारी व अनुदानित प्राइमरी, माध्यमिक स्कूल एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूल व निजी स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियों को एक सप्ताह बढ़ाया जाए। ऐसा होने से बच्चों को राहत मिलेगी। इसके अलावा अभी स्कूलों में फायर सेफ्टी को सुनिश्चित करने, उसकी एनओसी रिन्यू कराने व लेने की प्रक्रिया चल रही है। प्रवेश का कार्य भी चल रहा है।
महामंडल ने पत्र में कहा है कि गर्मी को देखते हुए एक सप्ताह अवकाश बढ़ाने के चलते जो एक सप्ताह पढ़ाई का कार्य देरी से शुरू होगा। उसकी भरपाई के लिए सरकार चाहे तो दीपावली के तीन सप्ताह के अवकाश की जगह स्कूलों में दो सप्ताह का ही दीपावली अवकाश घोषित करे। इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
गुजरात वाली अधिकार ग्रुप (अभिभावक एसोसिएशन) के प्रमुख जॉर्ज डायस ने भी सरकार से मांग की है कि राज्य में पढ़ रही भीषण गर्मी, चल रही हीट वेव को देखते हुए सरकार स्कूलों को 22 जून के बाद खोले। स्कूलें अभी 13 जून से खोलना हितकर नहीं है। सीबीएसई के स्कूल भी 22 जून व उसके बाद खुल रहे हैं। स्कूलों को देरी से खोलने से उनमें फायर सेफ्टी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने में भी मदद मिलेगी।