अहमदाबाद

ahmedabad: सड़क के श्वान हों या ‘पेट’, इलाज से अंतिम विदाई तक मनपा की व्यवस्था

श्वान अब केवल घर की रखवाली के लिए नहीं बल्कि ये अनेक परिवारों के घर के सदस्य की तरह अपनी जगह बना चुके हैं। शहर में स्ट्रीट डॉग भी शहरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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international dog day
पालतू श्वान का अंतिम संस्कार करते।

ahmedabad. अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा) ने श्वानों के लिए केवल नसबंदी और नियंत्रण तक सीमित न रहते हुए रजिस्ट्रेशन, रेबीज नियंत्रण, बीमार व घायल पशुओं के उपचार के लिए एंबुलेंस और मौत के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था विकसित की है। 26 अगस्त को इंटरनेशनल डॉग डे के मौके पर मनपा की ये व्यवस्थाएं खास तौर पर उल्लेखनीय हैं।

दो लाख स्ट्रीट डॉग, 50 हजार पेट का अनुमान

मनपा के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) के अध्यक्ष नरेश राजपूत के अनुसार शहर में करीब दो लाख स्ट्रीट डॉग होने का अनुमान है। हालांकि इनकी वास्तविक संख्या जानने के लिए वर्तमान में सर्वे चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद स्ट्रीट डॉग की संख्या का अधिक सटीक आंकड़ा सामने आएगा। वहीं शहर में करीब 50 हजार पालतू श्वान होने का भी अनुमान है।उन्होंने कहा कि पालतू श्वान रखने वाले मालिकों के लिए उनका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। अब तक करीब 20 हजार पालतू श्वानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। वर्तमान में रजिस्ट्रेशन शुल्क करीब 2 हजार रुपए है। रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य श्वानों का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ रेबीज की रोकथाम और श्वानों के लिए भविष्य में आवश्यक सुविधाएं विकसित करना भी है।

365 श्वानों को मिली सम्मानजनक अंतिम विदाई

अहमदाबाद की खास व्यवस्थाओं में मनपा संचालित पेट डॉग क्रिमेटोरियम भी शामिल है। पशु चिकित्सक डॉ. चिंतन पटेल के अनुसार यहां अब तक करीब 365 श्वानों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए केवल अहमदाबाद से ही नहीं, बल्कि गांधीनगर, बावला, भावनगर, सुरेंद्रनगर, सूरत, मेहसाणा, राजकोट और राजस्थान के उदयपुर से भी लोग अपने मृत पालतू श्वानों को लेकर पहुंचे हैं। अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां मटके में रखकर मालिकों को सौंपने की व्यवस्था भी है। वर्षों तक परिवार का हिस्सा रहे पेट को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिलने से पशु प्रेमियों को भावनात्मक संतुष्टि मिल रही है।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचती है मनपा की एंबुलेंस

बीमार या घायल पशुओं के लिए मनपा की ओर से एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाती है। सूचना मिलने पर मनपा की एंबुलेंस मौके पर पहुंचती है और वहीं पशु का प्राथमिक उपचार किया जाता है। यदि श्वान को आगे उपचार की आवश्यकता हो और उसे भर्ती करना जरूरी हो तो मनपा की ओर से उसे उपचार के लिए दाखिल कराया जाता है। इस तरह बीमार या घायल श्वानों के उपचार की व्यवस्था मनपा की ओर से ही संभाली जाती है।

10-12 साल से नसबंदी अभियान

स्ट्रीट डॉग की आबादी को नियंत्रित करने और रेबीज की रोकथाम के लिए मनपा का नसबंदी प्रोजेक्ट पिछले 10-12 वर्षों से चल रहा है। समय के साथ मनपा की सीमा में नए इलाके शामिल होने से नसबंदी और संबंधित कार्यों का दायरा भी बढ़ा है। स्ट्रीट डॉग की मौजूदा संख्या का पता लगाने के लिए सर्वे भी जारी है।

लैब्राडोर सबसे ज्यादा पसंदीदा नस्ल

अहमदाबाद में पालतू श्वानों को लेकर लोगों की पसंद भी रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में सामने आती है। इनमें लैब्राडोर रिट्रीवर सबसे आगे है। रजिस्टर्ड नस्लों में लैब्राडोर के 3,939, जर्मन शेफर्ड के 1,527, शिह त्जू के 1,497, गोल्डन रिट्रीवर के 1,416 और पोमेरेनियन के 1,138 श्वान दर्ज हैं। इसके अलावा बीगल 571, साइबेरियन हस्की 476, पग 400 और रॉटवाइलर 356 हैं

Updated on:
25 Aug 2026 09:04 pm
Published on:
25 Aug 2026 09:03 pm