
आणंद. जिले के लांभवेल गांव में हिंदू बनकर युवक से विवाह करने के बाद 12 साल से रह रही बांग्लादेशी महिला काजुली उर्फ काजल को आखिरकार आणंद जिला पुलिस ने बांग्लादेश भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, काजल को पहले आणंद एसओजी कार्यालय लाया गया, जहां उसके निर्वासन (डिपोर्टेशन) से संबंधित सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद उसे वडोदरा एयरपोर्ट ले जाकर भारतीय सेना के अधिकारियों को सौंप दिया गया। वहां से उसे ढाका भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
काजुली उर्फ काजल की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से आणंद के लांभवेल निवासी युवक तरुणकुमार पटेल से हुई थी। प्रेम संबंध के चलते लगभग 12 वर्ष पहले वह अवैध रूप से सीमा पार कर बांग्लादेश से भारत आई थी। वह पहले कोलकाता पहुंची और वहां से गुजरात के आणंद जिले के लांभवेल गांव पहुंची। उसने अपने प्रेमी से मुलाकात की और बाद में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया।
विवाह के बाद दोनों लांभवेल में रहने लगे। दंपती के दो पुत्र ध्यान और अर्श हैं। अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को उनके मूल देश वापस भेजने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत आणंद पुलिस ने काजल को बांग्लादेश भेज दिया। इसके साथ ही उसका परिवार बिछड़ गया।
उसके पति तरुणकुमार को डेढ़ महीने में नेताओं से संपर्क किया। नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई में सहयोग करने की सलाह दी थी। इस दौरान काजल को महिला गृह (नारी गृह) में रखा गया था, जहां उसके पति और बच्चों को उससे मिलने की अनुमति थी। एसओजी कार्यालय ले जाने और बाद में एयरपोर्ट रवाना किए जाने के बाद परिवार को उससे एक बार भी मिलने नहीं दिया गया। उसके पति ने उसे कुछ पैसे देने का भी प्रयास किया, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिल सकी। अंततः पत्नी से बिछड़ने के बाद तरुण एयरपोर्ट के बाहर फूट-फूटकर रो पड़ा।
इस मामले में आणंद के जिला पुलिस अधीक्षक जी. जी. जसाणी ने कहा कि ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि चूंकि संबंधित महिला अवैध रूप से भारत आई थी, इसलिए कानून के अनुसार उसे बांग्लादेश वापस भेजा गया है। हालांकि, अब वह बांग्लादेश जाकर विधिवत भारतीय वीजा प्राप्त करने के बाद कानूनी रूप से भारत वापस आ सकती है।