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Gujarat: बल्क मोड वाले कॉर्पोरेट बैंक खातों से साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश, छह आरोपियों को पकड़ा

-जांच में सामने आए आरोपियों के बैंक खातों के विरुद्ध देश भर में दर्ज हैं 22 मामले, डेढ़ करोड़ की ठगी में लिप्तता आई सामने, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम ने की कार्रवाई, कई और खुलासे होने के आसार
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साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टीम की गिरफ्त में आरोपी।

Ahmedabad. गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम ने अंतरराज्यीय साइबर ठग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बल्क मोड वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन्हें उस समय पकड़ा गया, जब ये बैंक खातों की जानकारी जुटाकर ऑनलाइन खातों का सत्यापन कर रहे थे। सिंडिकेट को रकम ट्रांसफर करने की तैयारी में थे। ऐसे में अहम समय पर इन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली है।

आरोपियों के कब्जे से मिले बैंक खातों की समन्वय पोर्टल पर जांच में पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल करीब 1.5 करोड़ रुपए की साइबर ठगी में हुआ है। देशभर में इनसे जुड़े 22 साइबर मामले दर्ज हैं। गुजरात के छह और महाराष्ट्र में दर्ज दो डिजिटल अरेस्ट के मामले भी शामिल हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में महेसाणा के अंकुर चौधरी, विसनगर के चेतन पटेल, गांधीनगर में नाना चिलोडा के किरण कुमार पंचाल, अहमदाबाद में निकोल के सुरेश रबारी व राजकुमार रावल तथा मुंबई के अक्षयसिंह परमार शामिल हैं। इनमें पहले तीन आरोपी बैंक खाते जुटाकर सिंडिकेट तक पहुंचाते थे, जबकि सुरेश और राजकुमार खातों की एपीके फाइल और लॉगिनस्क्रीन रिकॉर्डिंग की जांच कर आगे भेजते थे। अक्षय गिरोह और सिंडिकेट के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था।

गिरोह के लिए फेसीलिटेटर का काम करते थे आरोपी

जांच में सामने आया कि गिरोह कमीशन के लालच में बल्क मोड वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। साइबर ठग सिंडीकेट को खाताधारकों से लिए गए आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक, एटीएम कार्ड की तस्वीरें, इंटरनेट बैंकिंग की आईडी और पासवर्ड पहुंचाते। खातों में आसानी से लॉगिन हो सके, इसके लिए खाताधारकों के मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल कराते थे, ताकि बार-बार ओटीपी की जरूरत न पड़े। आरोपी साइबर सिंडिकेट के लिए फेसीलिटेटर का काम करते थे और बदले में कमीशन लेते थे। आरोपियों से सात मोबाइल फोन जब्त किए हैं।