आगे भी यह अभियान सबसे पहले भारत ही पूरा करेगा ....
" किसी अंतरिक्ष यान का विफल होना ठीक वैसा ही है जैसे आपका स्कूटर य़ा बाइक पंक्चर होती है अथवा उसमें और कोई खराबी हो जाती है और यह सब आपके स्तर पर तमाम सावधानी बरतने पर भी संभव है...."
यह विचार मेरे नहीं बल्की अंतारिक्ष विज्ञानी डॉ . सुरेन्द्र पाल के हैं । यह बात है वर्ष २००६ की . सितांबर अक्तुबर की ही. वे राजस्थान विश्वविध्यालय (जयपुर) में एक कार्यकम में मुख्य वक्ता थे . वे उस वक्त इसरो के शीर्ष पद पर थे। मैने तब उनका इंटरव्यू लिया था। उन दिनों भारत के २-३ अंतरिक्ष मिशन पूरी तरह से विफल रहे थे. यहां तक की लौंचिंग के कुछ पलों बाद ही विफल हो गये थे. मेरा पहला सवाल यही था कि भारत के अंतरिक्ष यान विफल क्यूँ हुये ? इसके जवाब में उन्होने यह बात कही थी. वो इंटरव्यू राजस्थान पत्रिका के प्रथम पेज पर छपा था. उसके एक वर्ष बाद १३.१०.२००७ को एक और अंतरिक्ष विद्वान प्रो आर.एन. अग्रवाल (अगनि मिसाइल बनाने में कलाम साब के मुख्य सहयोगी) से भी जयपुर में इंतरव्यू करने का मौका मिला. उन्होने भी कहा कि अंतरिक्ष मिशन का य़ह मतलब नही होता कि उस में हर चीज सफल ही होगी. उस विफलता का भी अपना अनुभव होता है जो अगले चरण में काम अाता है ....
इसके बाद मैं २००८ में भांकरोटा (जयपुर) के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एपीजे कलाम साहब से भी मिला, उनके विचार भी कुछ इसी प्रकार के थे।
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चन्द्रयान-२ की मामूली सी विफलता से उस यात्रा (३.८४ लाख किलोमीतर) के अनुभव को विफल नही माना जा सकता.... कुछ लोग लिख रहें हैं सोश्यल मीडिया पर और कुछ एंकर टीवी पर बता रहे हैं कि हम चांद पर नही जा सके। कुछ लोग चाँद से जुड़ी हुस्न, मेहबूब, इश्क वाली टटपूंजी शायरी भी कर रहे हैं। जबकि चाँद पर तो भारत बहुत पहले ही पहुँच गया था ... यह मिशन तो चाँद के दक्षिणी ध्रूव पर पन्हुचने का था .....जहां अब तक कोई देश नही गया है ...ज़ितनी दूर भारत गया है उतनी दूर तक भी अभी तक कोई देश नही जा सका है....भारत की यह एक बहुत बड़ी उड़ान है...आगे भी यह अभियान सबसे पहले भारत ही पूरा करेगा ....
एक बात य़ह भी कि..
कुछ लोग इस विफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना लगाने का अवसर मान रहे हैं उनके अनुसार मोदी जी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ा कर या वहां मौजूद होकर कोई गलती कर दी हो जबकि सभी विकसित देशों में प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति ऐसे मौकों पर मौजूद रहते हैं...देश के भीतर भी कुछ लोग और दुनिया के कुछ देश भी भारत की इस आंशिक विफलता से खुश हो रहे हैं जबकि भारत विफलता में भी बहुत कुछ हासिल कर चुका है। आमतौर पर भारत में क्रिकेट मैच और सेना की युद्ध संबंधी गतिविधियों में ही ऐसी सामूहिक चेतना और भागीदारी देखने को मिलती है। यह पहली बार है कि भारत की अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी उपलब्धि पर देशवासी गौरवान्वित और एकजुट हैं। ऐसा तकरीबन ३५ साल पहले तब हुआ था जब एक भारतीय राकेश शर्मा अंतरिक्ष पर पहुंचे थे।