साइबर धोखाधड़ी की रकम की हेराफेरी का एक और बड़ा घोटाला उजागर
राजकोट. भावनगर जिला मुख्यालय के बोरतलाव पुलिस स्टेशन ने साइबर क्राइम के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया गया है। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत पुलिस ने आठ मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। 134 म्यूल अकाउंट के माध्यम से 21 करोड़ रुपए से अधिक के ट्रांजेक्शन होने का खुलासा किया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत निर्दोष लोगों के नाम पर कुल 134 म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किराए के खाते) खुलवाए थे। इन खातों में अब तक 21.37 करोड़ रुपए से अधिक की संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ है।
गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को 10 से 20 हजार रुपए के कमीशन या किराए का लालच देकर उनके नाम पर आरोपियों की ओर से बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद वे खातों की चेकबुक, एटीएम कार्ड और लिंक किए गए सिम कार्ड की ‘किट’ अपने पास रख लेते थे। साइबर धोखाधड़ी से ठगे गए रुपए इन खातों में जमा कर आरोपी आंगड़िया पेढ़ी या क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से रकम को इधर-उधर कर देते थे।
8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में भावनगर और सूरत से जुड़े आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।इनमें दशरथ धांधलिया, आर्यन उर्फ लखन जोसेता, शैलेश उर्फ भूरो चौधरी, राहुल गोहेल, शफीन और माहीन, मिहिर सरवैया तथा अमन ओफथानी शामिल हैं। भावनगर के बोरतलाव पुलिस निरीक्षक एच.बी. चौहान ने यह मामला दर्ज किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क 1 जनवरी 2024 से 12 दिसंबर 2025 के बीच सक्रिय था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।