ऱाष्ट्रीय झील संरक्षण योजना
अजमेर.शहर की सुंदरता को चार चांद लगाने वाली आनासागर झील anasagar lakeके सुधार के लिए दावे बहुत किए गए। केन्द्र व राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए तो खर्च डाले लेकिन न तो झील ही संरक्षित lake conservation, हुए न ही झील ही सुंदर हुई। दिनों दिन इस पर अतिक्रमण का बदनुमा दाग लगता जा रहा है। आनासागर झील के पुनरूद्धार एवं संरक्षण के लिए संशोधित स्वीकृति 18.27 करोड़ crores रुपए की स्वीकृति केन्द्र सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के आदेश से 16 नवम्बर 2011 को जारी हुई। धन का अनुपात केन्द्र का 70 प्रतिशत एंव राज्य का 30 प्रतिशत रखा गया। अब तक कुल प्राप्त राशि 8.9976 करोड़ रुपए खर्च किए गए। केन्द्र व राज्य सरकार से 9.272 करोड़ रुपए प्राप्त होना शेष है।
यह किए गए दावे
आनासागर झील संरक्षण के लिए प्रस्तावित वेटेलैंड के निर्माण के लिए 32 हेक्टेयर भूमि अवाप्ति के लिए अवार्ड जारी हुआ। लेकिन कोर्ट केस के कारण कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका। नालों के गंदे पानी एंव झील की शुद्धता के लिए बायोरमेडिएशन का कार्य करवाए गए जिस हेतु झील व नालों के जल की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है। झील संरक्षण के लिए सामुदायिक सहभागिता से सूचना, शिक्षा एवं सम्पे्रषण की गतिविधियों के माध्यम से जन जागरण के कार्य करवाए जा रहे हैं।
3.20 करोड़ में निकाली मिट्टी
झील व झील में आने वाले नालों से 240000 क्यूबिक मिट्टी निकाली गई। इस पर 3.20 करोड़ रुपए खर्च हुए। हालांकि अब इससे तीन गुना मलावा आनासागर झील में डाला जा चुका है। इससे झील लगातार सिकुड़ती जा रही है। कब्जा कर मकान बनाए जा रहे है।चेकडेम वानीकीकरणआनासागर जलग्रहण क्षेत्र के विकास के लिए वन विभाग द्वारा 206 हेक्टेयर भूमि में फेंसिंग तथा वनीकरण का कार्य किया गया। जिसमें 31 चेक डेम का निर्माण कार्य करवाया गया। इस पर0.48 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
77 लाख के फाउंटेन
झील के पानी के शुद्धीकरण के लिए कंट्रोल एअरेशन कार्य के तहत,14 फ्लोटिंग फाउंटेन तथा पानी में ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए एरेटर्स लगाए गए है। इन पर 0.77 करोड़ रुपए खर्च हुए। हालांकि कि वर्तमान में झील से फाउंटेन गायब है। झील के पानी में ऑक्सीजन की कमी है। नगर निगम ने फाउंटेन टेकओवर ही नहीं किए।
जेटी प्लेटफार्म का निर्माण
आनासागर चौपाटी के पास एवं एनसीसी ऑफिस के पीछे जेटी प्लेटफार्म का निर्माण,चौपाटी से बरादरी पर 300मीटर लम्बाई में वाकर्स ट्रेक का कार्य कराया गया है। वैशाली नगर चेक डैम पर वाक-वे का कार्य 150 मीटर तक तथा 300 मीटर तक का पिचिंग कार्य करवाया गया इस पर 0.75 करोड़ रुपए खर्च हुए।