
किशनगढ़ (अजमेर): जिस बेटे को पिता की अर्थी को कंधा देना था, आज उसी की अर्थी उठते देख पूरा गांव आंसुओं में डूब गया। वर्दी पहनकर जनता की सुरक्षा का जिम्मा निभाने वाले बांदरसिंदरी इलाके के मुंडोती गांव निवासी कांस्टेबल शंकरलाल टेपन की जिंदगी एक सड़क हादसे में अचानक थम गई। पांच साल के बेटे ऋषि के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं सात महीने की गर्भवती पत्नी ललिता की दुनिया उजड़ गई। बुधवार को जब जवान की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मुंडोती पहुंची, तो हर आंख नम हो गई।
बता दें कि भीलवाड़ा जिले के शंभूगढ़ थाने में तैनात कांस्टेबल शंकरलाल टेपन मंगलवार देर रात गुलाबपुरा में रावण दहन कार्यक्रम की ड्यूटी पूरी कर बाइक से थाने की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज गति से आए ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। सड़क हादसा इतना गंभीर था कि शंकरलाल की मौके पर ही मौत हो गई। जिस जवान ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी ड्यूटी निभाई, वही ड्यूटी से लौटते समय जिंदगी की जंग हार गया।
बुधवार को कांस्टेबल शंकरलाल टेपन की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मुंडोती पहुंची। गांव में पहले से मौजूद परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर तरफ गमगीन माहौल था। परिवार के सदस्यों का विलाप देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पास जवान का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। पुलिस अधिकारियों ने दिवंगत कांस्टेबल को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम विदाई के दौरान जवान के पिता कानाराम टेपन को तिरंगा सौंपा गया। बेटे की सेवा के सम्मान में मिला तिरंगा पिता के हाथों में था, लेकिन जिस बेटे को सीने से लगाना था, वह हमेशा के लिए विदा हो चुका था।
शंकरलाल के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनका पांच साल का बेटा ऋषि अभी इतना छोटा है कि शायद उसे पिता के हमेशा के लिए दूर चले जाने का पूरा अहसास भी नहीं होगा। दूसरी ओर, उनकी पत्नी ललिता सात माह की गर्भवती हैं। परिवार जिस घर में आने वाले नए मेहमान की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा होगा, वहां अब मातम पसरा है।
शंकरलाल के परिवार में उनकी मां, पिता, छोटा भाई और दो बहनें हैं। पिता कानाराम टेपन अजमेर पुलिस लाइन में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। पिता स्वयं पुलिस विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और अब उन्हें अपने जवान बेटे को अंतिम विदाई देनी पड़ी। परिवार के लिए यह क्षति ऐसी है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
कांस्टेबल शंकरलाल टेपन वर्ष 2018 में भीलवाड़ा पुलिस में भर्ती हुए थे। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं और वर्तमान में शंभूगढ़ थाने में तैनात थे। रावण दहन कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी पूरी करने के बाद वे थाने की ओर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली।
शंकरलाल टेपन की अंतिम विदाई में किशनगढ़ विधायक डॉ. विकास चौधरी, गुलाबपुरा पुलिस उपाधीक्षक सतीश यादव, सीओ सिटी धर्मराज चौधरी, बांदरसिंदरी थाना प्रभारी बन्नालाल, भोजराज गुर्जर सहित पुलिस विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।
मुंडोती की मिट्टी ने अपने बेटे को अंतिम विदाई दी, लेकिन उसके पीछे छूट गए परिवार के लिए यह बिछोह जिंदगीभर का दर्द बन गया। वर्दी में देश और समाज की सेवा करने वाले शंकरलाल की यादें अब उनके परिवार के पास शेष हैं। पिता के हाथों में सौंपा गया तिरंगा उस जवान की सेवा की निशानी बन गया, जिसकी घर वापसी का इंतजार अब कभी पूरा नहीं होगा।