अजमेर

Rajasthan: जिला बनने से विकास को मिली नई रफ्तार; इस वर्ष मिलेगा पहला जिला प्रमुख

191 साल के ऐतिहासिक सफर के बाद ब्यावर को जिला बनने से नई पहचान मिली है। इस वर्ष पंचायत राज चुनाव के साथ जिले को पहला जिला प्रमुख मिलेगा।
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Feb 01, 2026
ब्यावर. शहर का विहंगम दृश्य।
फाइल फोटो-पत्रिका

अजमेर: ऐतिहासिक नगर ब्यावर आज अपना 191वां स्थापना दिवस मना रहा है। एक फरवरी 1836 को कर्नल जॉर्ज डिक्सन ने अजमेरी गेट के पास शहर बसाने की शुरुआत की थी। 19 दशकों के इस सफर में ब्यावर ने अंग्रेजी शासन, स्वतंत्रता आंदोलन, जनमत प्रजातांत्रिक व्यवस्था और अब जिला बनने तक के अनेक ऐतिहासिक पड़ाव देखे हैं। ब्यावर स्वतंत्रता संग्राम का सशक्त केंद्र रहा है। यहां की माटी ने क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों को आश्रय, ताकत और तकनीक दी। देश के आजादी के आंदोलनों में ब्यावर का नाम प्रमुखता से दर्ज है।

जिला बनने से विकास को नई रफ्तार


ब्यावर की वर्षों पुरानी जिला बनने की मांग 17 मार्च 2023 को पूरी हुई। इसके बाद 7 अगस्त 2023 को जिले का स्थापना दिवस मनाया गया। जिला बनने के बाद यह ब्यावर का तीसरा स्थापना दिवस है। जिला बनने के बाद जिला स्तरीय कार्यालय शुरु हो गए। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 11 के तहत 19 नवंबर को जिला परिषद गठन की अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही नवगठित जिला परिषद ब्यावर का क्षेत्राधिकार तय हुआ। जिला परिषद अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और राजसमंद का वर्तमान स्वरूप समाप्त हुआ और नए प्रशासनिक ढांचा तैयार हो गया है। इस साल पंचायत राज चुनाव के साथ ही जिला परिषद अस्तित्व में आ जाएगी। ब्यावर जिले को पहला जिला प्रमुख मिलेगा।
ऐतिहासिक उपलब्धियों का शहर ब्यावर

  • 1839 में अंग्रेजी शासन के दौरान ब्यावर को मेरवाड़ा प्रदेश का दर्जा मिला
  • 1 मई 1867 को नगर परिषद की स्थापना
  • 1888 में देश की पहली जनमत प्रजातांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत
  • देश की पहली ऊन और रूई की व्यापारिक मंडी
  • राजस्थान का पहला आयकर विभाग
  • करीब 150 वर्ष पूर्व सी.एन.आई. चर्च का निर्माण
  • एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट हब
  • मेरवाड़ा प्रदेश के राजस्थान में विलय के बाद ब्यावर लगभग 68 वर्षों तक प्रदेश का सबसे बडा उपखंड मुख्यालय रहा।प्रशासनिक अतीत रहा मजबूत

आजादी के बाद से लेकर जिला बनने तक ब्यावर में करीब 71 उपखंड अधिकारियों ने कार्यभार संभाला। मगरा मेरवाड़ा स्टेट के राजस्थान में विलय के बाद अब तक 77 उपखंड अधिकारी रह चुके हैं। राजस्थान में विलय से पहले और बाद तक पहले एसडीएम: ए.जे. सिंघानी (कार्यकाल 15 मई 1957 तक) रहा। 15 मई 1960 को पहले आईएएस अधिकारी टी.वी. रमन को उपखंड अधिकारी नियुक्त किया गया। प्रदेश की पहली नगर परिषद का गौरव भी ब्यावर को प्राप्त है। आजादी से पहले नगर परिषद भवन को कॉल्विन भवन कहा जाता था, जिसे बाद में नेहरू भवन नाम दिया गया।

बढ़ता शहर: नगर परिषद का विस्तार

1962: 16 पार्षद, आबादी 25-28 हजार
1965: 18 पार्षद

1970: 22 पार्षद
1988: 35 पार्षद

2008: 45 पार्षद
2019: 60 पार्षद, हाल में भी साठ पार्षद है।

शहरी सीमा का हुआ विस्तार

शहरी सीमा के विस्तार के साथ मेडिया, शम्भूपुरा, शोभापुरा, रामपुरा मेवातियान, मकरेड़ा, ब्यावरखास, सरमालिया, देलवाड़ा, दौलतपुरा बलाइयान, सेंसपुरा, बलाड, गढ़ीथोरियान, कुशालपुरा, मालपुरा (कालियावास), नून्द्रीमालदेव, गणेशपुरा, शिवनाथपुरा, गोविन्दपुरा, ठीकराना महेन्द्रातान, बाडिया श्यामा, रामसर बलाइयान, जालिया प्रथम, बाडिया जग्गा, नून्दीमेन्द्रातान, सिरोला, रतनपुरा सरदारा, डूंगरखेड़ा, केसरपुरा (परसा) और भोजपुरा सहित कई ग्राम शहरी सीमा में शामिल किए गए हैं। इससे नगर परिषद का दायरा बढ गया है। इन क्षेत्रों के मिलने से वार्ड तो नहीं बढ़े लेकिन वार्डों का दायरा बढ गया है।
अब नगर सुधार न्यास की दरकार

तेजी से बढ़ती आबादी और विस्तारित नगरीय क्षेत्र को देखते हुए अब ब्यावर में नगर सुधार न्यास की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि शहर का सुनियोजित और समुचित विकास हो सके तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पांच बत्ती चौराहा और केसरपुरा हाईवे जंक्शन का 90 डिग्री संरेखण, अजीब संयोग

ब्रिटिश काल में जब ब्यावर छोटा कस्बा था, तब पांच बत्ती चौराहा शहर का केंद्र था। शहर को क्रॉस के रूप में बसाया गया था। अब ब्यावर एक ज़िला बन चुका है। शहर के बाहर बने राष्ट्रीय राजमार्ग इंटरचेंज में भी उसी क्रॉस अवधारणा की झलक दिखाई देती है। हैरानी की बात यह है कि पांच बत्ती का केंद्र और नया हाईवे क्रॉस, जो लगभग 4.7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, एकदम 90 डिग्री के सटीक संरेखण में पाए गए हैं। विकास सैनी ने बताया कि इन दोनों का आकलन करे तो ऐसा लगता है कि जब शहर को बसाया गया तो क्रॉस की आकृति का आकार दिया गया। अब शहर का दायरा बढ गया। शहर से करीब साढे चार किलोमीटर दूर केसरपुरा पुलिया से सेटेलाइट तस्वीर को ले तो कुछ ऐसी ही आकृति बनती है। मानो इतिहास अपने को दोहरा रहा है।

Updated on:
01 Feb 2026 04:07 pm
Published on:
01 Feb 2026 04:05 pm