
अजमेर। अप्रैल माह की खामोश गुमशुदगी… मोबाइल की कॉल डिटेल ने जोधपुर के पीपाड़ तक पहुंचाया और खेत में बिखरी अस्थियों ने आखिरकार मौत का राज खोल दिया। ब्यावर साकेतनगर थाना क्षेत्र की 46 वर्षीय लीला रावत की संदिग्ध गुमशुदगी अब हत्या के सनसनीखेज खुलासे में बदल चुकी है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ना केवल आरोपी तक पहुंची, बल्कि आरोपी की निशानदेही पर खेत से मृतका के शरीर की अस्थियां भी बरामद कर लीं। अस्थियों की बरामदगी ने राजस्थान के बहुचर्चित भंवरी देवी हत्याकांड की याद को ताजा कर दिया।
साकेतनगर थाने के उप निरीक्षक कुम्भाराम ने शनिवार को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की मोर्चरी में 26 अगस्त को रखे गए कंकाल का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. वी. डी. बीजावत के नेतृत्व में गठित बोर्ड में एनाटॉमी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे। प्रारंभिक परीक्षण में तीन हड्डी जानवर की निकलीं तो जबकि शेष मानव अस्थियां डीएनए जांच के लिए भेजी गई है। पोस्टमार्टम के बाद शेष अस्थियां पुलिस ने परिजन को सौंप दी है।
गणेशपुरा निवासी लीला 13 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। अप्रैल में पिता ने गुमशुदगी दर्ज करवाई। इसके बाद बड़े बेटे राकेश ने 11 अगस्त को इस्तगासे के जरिए मुकदमा दर्ज करवाकर ननिहाल पक्ष पर हत्या का शक जताया। पुलिस की ओर से सीडीआर खंगालने पर 13-14 अप्रैल को लीला के मोबाइल की लोकेशन खोखरिया गांव में मिली। खोखरिया निवासी राजू गिरी के मोबाइल की टावर लोकेशन भी वहीं आई। पुलिस ने राजू को बिलाड़ा के पिचियाद से हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पूछताछ में राजू ने पहले शव तालाब में फेंकने फिर जलाने की बातें बताकर पुलिस को गुमराह किया। पुलिस की मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ में वह टूट गया और खेत में शव फेंकने की बात कबूल की। फिर अस्थियों को तार में बांधकर खेत में फेंकना कबूल किया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर खेत में ट्रैक्टर से हल चलवाकर दोनों पैर, कुछ पसलियां, धड़ और दांत बरामद किए।
पुलिस के अनुसार लीला और राजू करीब दो साल से संपर्क में थे। राजू का आरोप था कि लीला उससे दो लाख रुपए और उसकी पत्नी के गहने ले चुकी थी तथा ढाई लाख रुपए और मांग रही थी। गत 14 अप्रैल की रात राजू ने उसके पास सो रही लीला के सिर पर लाठी से वार कर हत्या कर दी। शव को खेत में छोड़ दिया। बाद में कंकाल बचने पर लोहे के तार से बांधकर उसे खेत में फेंक दिया, जहां मवेशियों की हड्डियां भी पड़ी थीं।
हत्या की वारदात ने भंवरीदेवी हत्याकांड की याद को ताजा कर दिया। जहां एएनएम भंवरी देवी की हत्या के बाद शव को जलाकर उसकी अस्थियां नहर में बहा दी गई थीं और मामले की जांच सीबीआई ने की। लीला के प्रकरण में तकनीकी जांच और सीडीआर के सहारे साकेतनगर थाने के उप निरीक्षक कुम्भाराम पहले हत्यारे राजू गिरी तक पहुंचे, फिर घटनास्थल से मृतका की अस्थियां बरामद करने में सफल रहे।