अजमेर

New Education policy: कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एडमिशन से एग्जाम तक होंगे ये बदलाव

विश्वविद्यालय और कॉलेज की परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में एकरूपता पर चर्चा हुई।

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Jul 31, 2020
new education policy

अजमेर. नई शिक्षा नीति के अनुसार महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय तैयारियों में जुट गया है। डीन कमेटी की बैठक में प्रवेश से परीक्षा तक एकरूपता को लेकर चर्चा की गई है। विवि प्रशासन ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया।

कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, आनंदम कोर्स, विश्वविद्यालय और कॉलेज की परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में एकरूपता पर चर्चा हुई। इस दौरान नई शिक्षा नीति के अनुसार प्रवेश, कोर्स और प्रायोगिक परीक्षा को समान बनाने, एक वर्षीय सर्टिफिकेट, दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू करने पर विचार-विमर्स हुआ। डॉ. डॉली दलेला, डॉ. एम.एल.अग्रवाल, प्रो. शिवप्रसाद, प्रो. शिवदयाल सिंह, प्रो. मनोज कुमार और अन्य मौजद थे।

स्कूल से भी खराब यूनिवर्सिटी के हाल, आठवां विभाग चलेगा रामभरोसे

रक्तिम तिवारी/अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के हालात सीनियर सेकंडरी स्कूल से बदतर हो चले हैं। विश्वविद्यालय में 1 अगस्त से मात्र 16 शिक्षक रह जाएंगे। यहां आठवां विभाग भी रामभरोसे चलेगा। कोरोना संक्रमण के चलते कक्षाएं बंद हैं, वरना विवि, सरकार और राजभवन के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है।

विश्वविद्यालय में कला, वाणिज्य, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, विधि, पत्रकारिता और अन्य संकाय संचालित हैं। मौजूदा वक्त 17 स्थाई शिक्षक कायर्रत हैं। जनसंख्या अध्ययन विभाग होगा खालीजनसंख्या अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी ठाकुर 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगी। लम्बे अर्से से वे विभाग की एकमात्र शिक्षक हैं। उनके कार्यरत रहते हुए यहां दो-तीन गेस्ट फेकल्टी पढ़ा रही हैं। 1 अगस्त से विभाग पूरी तरह अस्थाई शिक्षकों के भरोसे चलेगा।

इन विभागों में नहीं कोई शिक्षक
-राजनीति विज्ञान, इतिहास, रिमोट सेंसिंग, वैदिक वांग्मय, बीएड, एमएड, हिंदी, पत्रकारिता, कॉमर्स, लॉ विभाग, जनसंख्या अध्ययन (1 अगस्त से)

एक शिक्षक के भरोसे यह विभाग
कम्प्यूटर विज्ञान, जूलॉजी, बॉटनी, प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री, अर्थशास्त्र

इसीलिए पिछड़ा ग्रेडिंग में....
यूजीसी ने साल 2004 और 2017 में विश्वविद्यालय को बी डबल प्लस ग्रेड प्रदान की। इसे ए या ए प्लस ग्रेडिंग नहीं मिलने की एकमात्र वजह शिक्षकों कमी है। नैक टीम ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती को जरूरी बताया है। शिक्षकों की कमी के चलते ही विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या भी सीमित है।

Published on:
31 Jul 2020 07:14 am
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