अरावली पर कब्जा जारी है। सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग को कोई परवाह नहीं है।
अजमेर.
पहाड़ों को काटकर अवैध घरौंदे बनाने वाले अतिक्रमियों के खिलाफ वन विभाग कुछ नहीं कर पाया। बीते अगस्त में कई इलाकों में अतिक्रमियों को नोटिस दिए लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। अतिक्रमियों का अरावली पर कब्जा जारी है। सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग को कोई परवाह नहीं है।
नागफणी-बोराज, तारागढ़ संपर्क सड़क, शास्त्री नगर-वैशाली नगर, आंतेड़-राजीव कॉलोनी के क्षेत्र, पंजीयन कार्यालय के पीछे, जटिया कॉलोनी सहित अन्य इलाकों में कई लोगों ने पहाड़ी पर कब्जे कर लिए हैं। यहां सैकड़ों पक्के-कच्चे मकानों-कमरों, दुकानों का निर्माण हो चुका है। लोग सांठ-गांठ कर बिजली-पानी के कनेक्शन ले चुके हैं। साल 1990-91 तक अरावली की पहाडिय़ों पर अतिक्रमण कम थे। पिछले 30 वर्षों में हालात बिगड़ चुके हैं।
सिर्फ दिखावटी नोटिस!
वन विभाग ने नागफणी, आंतेड़, तारागढ़ संपर्क सहित कई इलाकों में अतिक्रमियों को नोटिस दिए। इसमें अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई। कायदे से विभाग को अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई करनी थी। लेकिन दो महीने में कहीं अभियान या कार्रवाई नहीं नजर आई। मालूम हो कि साल 2011-12 में राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर में अरावली पर्वत से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। सियासी विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी।