अलवर जिले में नफरी की कमी पुलिस महकमे की परेशानियां बढ़ा रही है। इससे पुलिस की कार्यक्षमता और कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। अलवर सीमावर्ती जिला होने के कारण इसे अपराध की दृष्टि से क्रिटिकल माना जाता है।
अलवर जिले में नफरी की कमी पुलिस महकमे की परेशानियां बढ़ा रही है। इससे पुलिस की कार्यक्षमता और कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। अलवर सीमावर्ती जिला होने के कारण इसे अपराध की दृष्टि से क्रिटिकल माना जाता है। इस हिसाब से जिले के लिए स्वीकृत नफरी को पहले से ही कम आंका जाता रहा है।
वहीं, अब पुुलिसकर्मियों के खाली पद व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन में आड़े आ रहे हैं। जिले में 1200 की पुलिस नफरी स्वीकृत है, लेकिन 911 पुलिसकर्मी ही उपलब्ध है। स्वीकृत नफरी में से भी 289 पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में मानवीय संसाधनों की कमी से जूझ रहे पुलिस विभाग को अपराध नियंत्रण के साथ कई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
थाने में पोक्सो एक्ट, एससी-एसटी अपराध एवं अन्य राज्यों की तामीलेें आती हैं। न्यायालय के स्थायी वारंट पर भी त्वरित कार्य करने में परेशानी आती है। अगर कोई थाने का स्टाफ अवकाश या तामील में जाता है तो अन्य काम ठप हो जाते हैं। आए दिन होने वाले धरना-प्रदर्शन आदि में थानों से जाब्ता लगाया जाता है। इसके कारण प्रो-एक्टिव पुलिसिंग में परेशानी के साथ ही पुलिसकर्मियों के रूटीन अवकाश भी प्रभावित हो रहे हैं।
हमारे पास उपलब्ध मानवीय व अन्य संसाधनों के बेहतर उपयोग का प्रयास किया जा रहा है। परिवादी को त्वरित न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए अधिकारियों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। -संजीव नैन, पुलिस अधीक्षक, अलवर।
जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 26 थाने हैं। इसके अलावा स्थायी, अस्थायी व गौ-रक्षा चौकियों को मिलाकर करीब 33 चौकियां हैं। सबसे अधिक 7 कोतवाली थाने की और 4 चौकियां राजगढ़ थाने के अंतर्गत आती है। शिवाजी पार्क थाना, अरावली विहार थाना, रामगढ़, एमआईए, मालाखेड़ा, थानागाजी, प्रतापगढ़, रैणी, लक्ष्मणगढ़, बड़ौदामेव व कठूमर थाने के अंतर्गत एक-एक चौकियां हैं। एनईबी थाना, नौगावां, सदर, अकबरपुर व गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में दो-दो चौकियां हैं।
जिले में हर साल करीब 12 हजार आपराधिक मामले दर्ज होते हैं। अनुसंधान अधिकारी के 242 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 149 पद रिक्त हैं। आपराधिक मामलों की जांचें प्रभावित हो रही हैं। कई मामलों में अनुसंधान में देरी के परिवादी को समय पर न्याय भी नहीं मिल पाता है। पुलिस पर काम का बोझ भी बढ़ रहा है।
कोतवाली थाने में 105 पुलिसकर्मियों का स्टाफ स्वीकृत है, इसमें से 74 कार्यरत हैं, जबकि 31 पुलिसकर्मी कम हैं। इसी तरह शिवाजी पार्क थाने में 50 में से 35, एनईबी में 51 में से 46, अरावली विहार में 52 में से 51, वैशाली नगर में 60 में से 33, रामगढ़ में 49 में से 41, नौगावां में 44 में से 33, बगड़ तिराहा में 45 में से 33, सदर में 56 में से 51, विजय मंदिर थाने में 30 में से 28 और अकबरपुर थाने में 59 में से 30 की नफरी उपलब्ध है।
जबकि थानागाजी थाने में 43 में से 31, प्रतापगढ़ में 36 में से 26, राजगढ़ में 59 में से 43, रैणी में 38 में से 30, टहला में 37 में से 23, लक्ष्मणगढ़ में 50 में से 36, गोविंदगढ़ में 43 में से 39, खेरली में 50 में से 33, कठूमर में 64 में से 25, बहतुकलां में 44 में से 20, महिला थाने में 24 में से 20 और साइबर थाने में 12 पद स्वीकृत है, लेकिन 10 कर्मचारियों का स्टाफ काम कर रहा है। वहीं, केवल एमआईए, मालाखेड़ा और बड़ौदामेव में स्वीकृत नफरी उपलब्ध है।