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Alwar: अलवर में संतों की शाही सवारी, कुंभ की तर्ज पर निकली शोभायात्रा

अलवर में सावन मास के अंतिम सोमवार को कुंभ की तर्ज पर संतों की शाही सवारी निकाली गई। तिजारा फाटक शक्ति शिव सेवक योग साधना आश्रम से शुरू हुई सवारी में देशभर के संत-महात्मा और नागा साधु शामिल हुए। शहर के मार्गों से निकली सवारी का श्रद्धालुओं ने स्वागत किया।
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Aug 24, 2026
alwar sant shahi sawari
संतों की शाही सवारी (फोटो - पत्रिका)

अलवर में सावन मास के अंतिम सोमवार को संतों की शाही सवारी निकाली गई। तिजारा फाटक गणपति विहार स्थित शक्ति शिव सेवक योग साधना आश्रम में आयोजित दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत यह आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत रविवार सुबह रामायण पाठ के साथ हुई थी। इसके बाद देशभर से संत-महात्माओं के अलवर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आश्रम में संतों के ठहरने और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई थी।

आश्रम के महंत अनूप गिरी ने बताया कि आज आश्रम से संतों की शाही सवारी रवाना हुई। सवारी तिजारा फाटक से निकलकर अंबेडकर चौराहा, भगत सिंह, एरोड्रम रोड होते हुए वापस तिजारा फाटक स्थित आश्रम पहुंची। कुंभ की तर्ज पर आयोजित इस शाही सवारी में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संतों के साथ नागा साधुओं ने भी हिस्सा लिया।

श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन किए

शाही सवारी में प्रमुख संतों को घोड़ों पर बैठाकर शामिल किया गया, जबकि अन्य संत पैदल ही सवारी में आगे बढ़े। रास्ते में धार्मिक माहौल नजर आया और श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन किए। आयोजन को लेकर आश्रम परिसर को भी विशेष रूप से सजाया गया था। यहां स्थित अमरगिरी गुरुजी की समाधि को फूलों और अन्य सजावटी सामग्री से सजाया गया।


कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के सचिव महंत सत्यगिरी महाराज, पंचदशनाम आव्हान अखाड़ा श्री क्षेत्र काशी के कुंभ मेला प्रभारी महामंडलेश्वर रामगिरी, सभापति महंत प्रयाग भारती, महंत पूनम गिरी, महंत कैलाशपुरी, महंत सुंदरपुरी, महंत रमता पंच नरेश गिरी महाराज और महंत रमता पंच हरिहर पुरी महाराज सहित कई संत शामिल हुए।

शाही सवारी के बाद आश्रम में संतों का संगम, सत्संग, भंडारा और फूलडोल समारोह आयोजित किया गया। सावन के अंतिम सोमवार पर हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे। संतों के साथ धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर लोगों ने आशीर्वाद लिया।

शाही सवारी शहर में आकर्षण का केंद्र

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य संतों के सान्निध्य में धार्मिक वातावरण तैयार करना और सनातन परंपराओं से लोगों को जोड़ना है। दो दिवसीय आयोजन के दौरान आश्रम में भजन, सत्संग और संतों के प्रवचन भी हुए। संतों की शाही सवारी अलवर शहर में आकर्षण का केंद्र रही और इसके चलते दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। आयोजन के दौरान संतों की उपस्थिति को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। कई लोगों ने सवारी के मार्ग में खड़े होकर संतों के दर्शन किए। आश्रम पहुंचने के बाद संतों का स्वागत किया गया। इसके बाद धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

Updated on:
24 Aug 2026 12:50 pm
Published on:
24 Aug 2026 12:48 pm