
प्रतिभा किसी बड़े शहर या खास पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। मेहनत और सही अवसर मिलें, तो छोटे शहरों से निकलकर भी दुनिया में पहचान बनाई जा सकती है। अलवर के डॉ. संसार राज मीणा ने इसे सच कर दिखाया है। उनकी इस उपलब्धि से अलवर और राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है।
डॉ. संसार राज मीणा को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University), अमेरिका और एल्सवियर (Elsevier) की ओर से जारी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। उन्हें इंजीनियरिंग (Engineering) विषय के तहत जियोलॉजिकल एंड जियोमैटिक्स इंजीनियरिंग (Geological and Geomatics Engineering) श्रेणी में जगह मिली है। इस उप-क्षेत्र में उनकी वैश्विक रैंक 1606 बताई गई है।
डॉ. मीणा भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology), रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की मदद से भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन करने पर काम कर रहे हैं। उनका शोध आपदाओं की पहचान, निगरानी और पूर्वानुमान को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
डॉ. मीणा फिलहाल इटली के ट्रिएस्टे शहर स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान एवं प्रायोगिक भूभौतिकी संस्थान में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। वे इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पाडोवा (University of Padova) से बाहरी शोधकर्ता और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी (Boston University) से विजिटिंग रिसर्चर के रूप में भी जुड़े हैं।
उनकी एक और बड़ी उपलब्धि इटली की एफआईएस (FIS) योजना के तहत मिली रिसर्च परियोजना है। उनकी ‘NATURA’ परियोजना को करीब 14 करोड़ रुपए का अनुदान मिला है। वे इस परियोजना में मुख्य अन्वेषक (Principal Investigator) के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं।
डॉ. संसार राज मीणा मूल रूप से दौसा जिले के मंडावर गांव के निवासी हैं। उनका परिवार बाद में अलवर आकर बस गया। उनकी शुरुआती पढ़ाई अलवर में हुई। इसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ और सिल्वर ओक स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से भूगोल में स्नातक करने के बाद उन्होंने नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे से छात्रवृत्ति लेकर जीआईएस और रिमोट सेंसिंग में मास्टर्स किया।
इसके बाद भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप से ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ साल्जबर्ग से जियोइन्फॉर्मेटिक्स में पीएचडी की। उन्होंने बताया कि इस छात्रवृत्ति ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। पीएचडी के बाद उन्होंने इटली में पोस्टडॉक्टोरल शोध किया और कई शोध परियोजनाओं से जुड़े।
डॉ. मीणा का कहना है कि युवा अक्सर सरकारी नौकरी को ही सफलता का रास्ता मानते हैं। सरकारी सेवा सम्मानजनक है, लेकिन विज्ञान और शोध भी समाज व देश की सेवा का मजबूत माध्यम हैं। गांव और छोटे शहरों से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक बना जा सकता है।