पहले था 50 रुपए शुल्क , होटल प्रबंधक का तर्क शुल्क बढ़ाना जरूरी
अलवर. देशी-विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय पर्यटकों भी अब सिलीसेढ़ होटल को देखने के लिए सौ रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क अदा करना होगा। करीब एक सप्ताह पहले ही विभाग से आदेश लेकर सिलीसेढ़ होटल प्रशासन ने शुल्क 50 रुपए से बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया है। शुरूआत में जब 50 रुपए शुल्क किया गया तब भी इसका विरोध हुआ था। अब सप्ताह में किसी भी दिन जाएंगे तो 100 रुपए ही शुल्क लगेगा। जबकि पहले यह व्यवस्था की गई थी कि शनिवार व रविवार को दो दिन 100 रुपए शुल्क और बाकी पांच दिन 50 रुपए शुल्क निर्धारित था। जिसे अब बढ़ा दिया है। जिसका सबसे अधिक असर स्थानीय लोगों पर पड़ेगा। जो पहले सामान्य तौर पर सिलीसेढ झील को निहारने आ जाते थे अब नहीं आ सकेंगे।
कार से पांच जने आए तो 500 रुपए प्रवेश शुल्क :
कार से पांच जने सिलीसेढ़ घूमने आए हैं और पाल से आगे जाना चाहते हैं तो मुख्य गेट पर 500 रुपए शुल्क देकर ही आगे जा सकेंगे। 18 जुलाई से यह शुल्क बढ़ाया है। उसके बाद से ही सिलीसेढ़ होटल तक गिनेचुने पर्यटक ही पहुंच रहे हैं। अधिकतर पाल के नीचे ही अपने वाहनों को पार्क कर पाल के ऊपर से सिलीसेढ़ झील का नजारा देखकर वापस लौट रहे हैं।
दुर्घटना का डर पूरा :
पाल से ऊपर जब सिलीसेढ़ होटल पर पहुंचते हैं तो बीच में दो जगहों पर झील की दीवार ही गिराऊ है। एक जगह तो गिर भी चुकी है। अधिक बारिश में सडक़ के धंसने का डर बना हुआ है। जबकि प्रशासन का यह तर्क है कि आय के अनुसार कार्य करा रहे हैं।
नीचे की दुकानें चलने लगी
सिलीसेढ़ होटल प्रशासन के इस निर्णय से उनके यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या जरूर कम हुई है। लेकिन इससे नीचे बनी निजी दुकानों की बिक्री काफी बढ़ गई है। यह मसला की जांच का है कि आखिर एेसा करने की वजह क्या है। पर्यटकों की संख्या गिरी तो अच्छा संदेश नहीं जाएगा। कहीं एेसा नहीं हो बहरोड़ मिड वे की तरह इसे भी बंद करना पड़ जाए।
बढ़ा दी फीस
हमने शुल्क प्रति दिन 100 रुपए प्रति व्यक्ति कर दिया है जिससे राजस्व बढ़ा है। होटल बंद होते जा रहे हैं। बचाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। विभाग की अनुमति से यह निर्णय किया गया है।
केसर सिंह, प्रबन्धक, सिलीसेढ़ होटल
घट रहे पर्यटक
जब से 100 रुपए शुल्क किया है जिले व आसपास के पर्यटक कम हो गए हैं। इस कारण बोटिंग करने वाले भी कम पहुंच रहे हैं।
नरेन्द्र, बोटिंग संचालक