
शहर के विकास के लिए योजनाएं तो बड़े जोर-शोर से तैयार होती हैं, लेकिन धरातल पर उतरने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। अलवर को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर संवारने का सपना एक बार फिर फाइलों में अटक गया है। अलवर यूआईटी और नगर निगम ने चार महीने पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करके मंजूरी के लिए जयपुर स्मार्ट सिटी परियोजना कार्यालय भेजी थी, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिल पाई है।
अलवर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करने का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी अलवर का चयन इस योजना के तहत किया गया था। उस समय यूआईटी ने करीब 500 करोड़ रुपये के बड़े विकास प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजे थे। हालांकि, बजट अधिक होने का हवाला देकर तत्कालीन सरकार ने कदम पीछे खींच लिए और योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
इसके बाद मौजूदा भाजपा सरकार ने अलवर को दोबारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल कर 63 करोड़ रुपए का बजट पास किया। नए बजट के हिसाब से यूआईटी और निगम ने नए सिरे से कटीघाटी से जेल सर्किल मार्ग के विकास का प्रस्ताव बनाकर भेजा, लेकिन अब जयपुर स्तर पर यह फाइल फिर से अटक गई है।
स्वीकृति न मिलने के कारण शहर को चमकाने से जुड़े कई अहम काम पूरी तरह रुक गए हैं।
योजना के अटकने से शहरवासियों को आधुनिक और सुगम यातायात की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। लोग लंबे समय से इस इंतजार में हैं कि परियोजना शुरू हो तो शहर की सूरत बदले, जाम की समस्या से मुक्ति मिले और रात के समय भी पर्यटन की बेहतर गतिविधियां देखने को मिलें। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर अटकी इस फाइल को कब तक मंजूरी मिल पाती है।
इस प्रोजेक्ट की जानकारी जयपुर स्मार्ट सिटी परियोजना कार्यालय से करेंगे और फिर कार्यवाही आगे बढ़ाएंगे - बीना महावर, कार्यकारी सचिव, यूआइटी