
Alwar Thar Accident: अलवर जिले में पिछले साल नवंबर के महीने में हुए एक भयानक सड़क हादसे ने पूरे हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया था। उस वक्त तेज रफ्तार एसयूवी गाड़ी की टक्कर से एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई थी, जबकि मासूम खुशबू गंभीर रूप से घायल हो गई थी। साढ़े सात महीने तक बिस्तर पर जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद आखिरकार गुरुवार रात खुशबू की सांसें भी थम गईं। इस मौत के बाद पूरे इलाके में एक बार फिर मातम पसर गया है और ग्रामीणों की आंखें नम हैं।
पारिवारिक लोगों से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार रात करीब 9 बजे घर पर अचानक खुशबू की सांसें बहुत तेज चलने लगीं। उसकी तबीयत बिगड़ती देख घबराए परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर भागे। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसकी जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने बताया कि 1 नवंबर को हुए उस भीषण एक्सीडेंट के बाद खुशबू के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं, जिसकी वजह से वह पैरालाइज्ड यानी लकवाग्रस्त हो गई थी। उसका जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में करीब एक महीने तक आईसीयू में इलाज चला था। हालत में थोड़ा सुधार होने के बाद परिजन उसे नांगल खेड़ा स्थित घर ले आए थे। घर पर ही उसकी दवाइयां चल रही थीं और उसे हर महीने रूटीन चेकअप के लिए जयपुर ले जाया जाता था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
यह दर्दनाक हादसा पिछले साल 1 नवंबर की शाम को हुआ था। ककराली के नंगली झीड़ा गांव के रहने वाले महेंद्र जाटव (35) अपनी पत्नी गुड्डी देवी (30), बेटे पूर्वांश (3), भतीजी पायल (13) और खुशबू को बाइक पर बैठाकर एक शादी के महिला संगीत कार्यक्रम से घर लौट रहे थे। तभी छठी मील के पास सामने से आ रही एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार थार गाड़ी ने उनकी बाइक को सामने से उड़ा दिया था।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए थे। हादसे में महेंद्र, उनके बेटे पूर्वांश और भतीजी पायल की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पत्नी गुड्डी देवी ने अस्पताल में दम तोड़ा था। उस वक्त खुशबू इकलौती जिंदा बची थी, लेकिन अब साढ़े सात महीने बाद उसने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।