
सरिस्का में टाइगर का फाइल फोटो
सरिस्का के बफर एरिया में बाघाें की संख्या दो साल में बढ़कर 11 पहुंच गई। एक्सपर्ट मानते हैं कि अब सरिस्का प्रशासन इस बफर एरिया को कोर एरिया में शामिल करते हुए मॉनिटरिंग बढ़ाए। सरिस्का के बफर एरिया में बाला किला, अंधेरी, किशनकुंड आदि एरिया आता है। इन क्षेत्रों में एसटी-2302 व उसके दो शावकों का विचरण बना हुआ है। इसी तरह एसटी-18, एसटी-19 व एसटी-31 का भी मूवमेंट रहता है। इस एरिया में शावक लगातार बढ़ रहे हैं। बाला किला के मुख्य मार्ग पर आकर ये शिकार कर रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि यह जंगल घना होने के कारण भविष्य में यहां बाघों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में इसकी सुरक्षा जरूरी है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व को सबसे पहले 1955 में वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा दिया गया था। इसके बाद भारत सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर के तहत इसे 1978 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। आजादी से पहले ्रबफर एरिया काफी समृद्ध था, यह अब फिर से समृद्ध हुआ है। सरिस्का के रिटायर्ड फील्ड डायरेक्टर आरएस शेखावत का कहना है कि वर्ष 1950 से पहले बफर एरिया का जंगल कम हो गया था। इसके उजड़ने से बाघों की ब्रीडिंग नहीं हो पाई। वर्तमान में जंगल घना हो गया है। बाघों ने अपना बसेरा बना लिया। ऐसे में इस एरिया को बफर से निकालकर कोर में लाने की जरूरत है। मानवीय दखल व मवेशियों के प्रवेश की मॉनिटरिंग भी करनी होगी।
सरिस्का में जिस तरह से बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है, उसके अनुरूप जंगल का इलाका कम पड़ रहा है। आने वाले दिनों में कई शावक वयस्क होंगे। ऐसे में टेरेटरी बनाने के लिए उन्हें अन्य बाघों से संघर्ष करना पड़ेगा। सरिस्का प्रशासन विस्तार के लिए कवायद कर चुका है, लेकिन अभी तक सक्षम स्तर से मंजूरी नहीं मिल पाई है। बढ़ती बाघों की संख्या के कारण अन्य वन्यजीवों को भी जगह नहीं मिल पा रही है। सरिस्का में लेपर्ड की संख्या भी अच्छी खासी है। यहां वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण मिलने की वजह से लगातार संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन जब तक सरिस्का का क्षेत्र नहीं बढ़ेता तब तक बाघों को स्वच्छंद विचरण में परेशानी होगी।
Updated on:
19 Jun 2026, 10:50 AM IST
Published on:
19 Jun 2026, 10:50 AM IST
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