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Alwar: मंत्री के आदेश दरकिनार, डीएपी-यूरिया के साथ किसानों को थमा रहे नैनो लिक्विड खाद

डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद किसानों के लिए खेती करना महंगा हो गया है। इस बीच यूरिया और डीएपी खाद के साथ नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की लिक्विड खाद को जबर्दस्ती किसानों को थोपा जा रहा है, इससे किसान परेशान हैं। यह खाद खरीदने से उनकी खेती की लागत में इजाफा हो रहा है।
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अलवर

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Umesh Sharma

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Updated: 18 Jun 2026, 5:26 PM IST

Climate change effect on agriculture

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

अलवर में खरीफ सीजन में खेतों के लिए खाद जुटाने निकले किसानों को अब एक नई शर्त पूरी करनी पड़ रही है। जिले की कई सहकारी समितियों पर यूरिया और डीएपी खाद के साथ नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की लिक्विड खाद अनिवार्य रूप से दी जा रही है। किसानों का आरोप है कि उन्हें जरूरत खाद की है, लेकिन खाद लेने के लिए नैनो उत्पाद खरीदना मजबूरी बना दिया गया है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों में नाराजगी लगातार गहराती जा रही है।

किसानों को कहना है कि कहीं दो कट्टों पर एक तो कहीं तीन कट्टों पर एक बोतल लेने की शर्त रखी जा रही है। ऐसे में यदि किसी किसान को 10 कट्टे खाद की आवश्यकता है तो उसे 4 से 5 नैनो लिक्विड खाद भी खरीदनी पड़ रही हैं। इसका सीधा असर उसकी जेब पर पड़ रहा है। वहीं, हाल ही में कृषि राज्य मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि किसानों को नैनो खाद की जबरन नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद जिले में लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

खाद की जरूरत, बढ़ रहा अतिरिक्त खर्च

डीएपी खाद का एक कट्टा करीब 1350 रुपए में मिल रहा है, जबकि नैनो डीएपी की एक बोतल के लिए करीब 600 रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है। डीजल, बीज, कीटनाशक और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच अब खाद के साथ नैनो उत्पादों का अतिरिक्त खर्च उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। किसानों का आरोप है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग, मात्रा और प्रभाव को लेकर उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। कई किसानों ने समितियों पर आपत्ति भी दर्ज कराई है।

किसानों के अनुसार प्रमुख परेशानियां

-नैनो यूरिया/डीएपी का छिड़काव अलग से करना पड़ता है, जिससे श्रम और समय बढ़ता है।
-स्प्रे के लिए अलग टंकी और मशीन की जरूरत पड़ती है, जिससे लागत बढ़ती है।
-कई किसानों का दावा है कि उन्हें इसके उपयोग की पर्याप्त जानकारी और प्रशिक्षण नहीं मिला।
-कुछ किसान पारंपरिक खाद की तुलना में नैनो उत्पादों के परिणामों को लेकर अभी भी आशंकित हैं।
-बारिश या तेज हवा के दौरान स्प्रे करना कठिन है।